कृषि क्षेत्र में तेजी लाने की पहल, केंद्रीय मंत्री ने महाराष्ट्र में RKVY कार्यान्वयन की समीक्षा की

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत जारी निधि के उपयोग का आकलन करने और महाराष्ट्र सरकार को दूसरी किस्त (सेकेंड मदर सैंक्शन) जारी करने पर विचार करने के लिए एक वर्चुअल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में महाराष्ट्र सरकार के कृषि मंत्री श्री दत्तात्रेय भरणे, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने आरकेवीवाई योजना के तहत महाराष्ट्र को पहली किस्त के रूप में 335 करोड़ रुपये जारी किए थे। राज्य ने इसमें से लगभग 260 करोड़ रुपये का उपयोग कर लिया है, जो निर्धारित 75 प्रतिशत उपयोग के मानक से अधिक है। इसके साथ ही महाराष्ट्र दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए पात्र बनने वाला पहला राज्य बन गया है। मंत्री महोदय ने सूचित किया कि 335 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इस बैठक में महाराष्ट्र सरकार के कृषि मंत्री श्री दत्तात्रेय भरणे, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने आरकेवीवाई योजना के तहत महाराष्ट्र को पहली किस्त के रूप में 335 करोड़ रुपये जारी किए थे। राज्य ने इसमें से लगभग 260 करोड़ रुपये का उपयोग कर लिया है, जो निर्धारित 75 प्रतिशत उपयोग के मानक से अधिक है। इसके साथ ही महाराष्ट्र दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए पात्र बनने वाला पहला राज्य बन गया है। मंत्री महोदय ने सूचित किया कि 335 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
महाराष्ट्र सरकार को बधाई देते हुए श्री चौहान ने निर्धारित समय के भीतर आरकेवीवाई निधि का 75 प्रतिशत से अधिक समग्र उपयोग हासिल करने के लिए राज्य की सराहना की। उन्होंने महाराष्ट्र को दूसरी किस्त के लिए पात्र बनने वाला पहला राज्य बताया और कहा कि यह उपलब्धि कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर व्यय के साथ-साथ निरंतर निगरानी भी होनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जाए, जिनके लिए उन्हें स्वीकृत किया गया है। उन्होंने किसान पहचान पत्र बनाने में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की भी सराहना की और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राज्य द्वारा दी गई त्वरित वित्तीय सहायता को याद किया, जिसके तहत लगभग 14,000 करोड़ रुपये का मुआवजा पांच दिनों के भीतर सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किर दिया गया था।

आरकेवीवाई के तहत विभिन्न घटकों की समीक्षा करते हुए श्री चौहान ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के अंतर्गत संतोषजनक प्रगति को स्वीकार किया और राज्य के कार्यान्वयन प्रयासों की सराहना की। इसके साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र को डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम), बीज, तिलहन और कृषि वानिकी घटकों के तहत खर्च में तेजी लाने की सलाह दी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि निधि उपयोग में सुधार के लिए बीज घटक के अंतर्गत लंबित देनदारियों का जल्द से जल्द भुगतान दर्ज किया जाए।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के कार्यान्वयन पर भी अलग से चर्चा हुई। मंत्री महोदय ने फसल बीमा के लिए आवेदन करते समय किसानों द्वारा सटीक जानकारी देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और गैर-केसीसी दोनों किसान फसल बीमा लाभ उठाने के लिए पात्र हैं, लेकिन किसी अन्य खाते के माध्यम से आवेदन करके केसीसी स्थिति को छिपाने से बचा जाना चाहिए। पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जानकारी की सटीकता सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान के लाभों को सीमित करना।

श्री चौहान ने रेखांकित किया कि केंद्र सरकार ब्याज छूट और समय पर पुनर्भुगतान के लिए प्रोत्साहन के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसलिए, पारदर्शिता और सार्वजनिक संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए जानकारी का सही प्रकटीकरण आवश्यक है।

महाराष्ट्र के निरंतर प्रदर्शन पर विश्वास व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य आरकेवीवाई के शेष घटकों में कार्यान्वयन में और सुधार करेगा तथा कृषि क्षेत्र के विकास में योगदान देना जारी रखेगा।

By Rajeev Sharma

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