नई दिल्ली(राजीव शर्मा): भारत और बेल्जियम ने रक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया है।
यह सहमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के बीच नई दिल्ली में हुई वार्ता के दौरान बनी। डी वेवर बेल्जियम के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार भारत की यात्रा पर आए हैं।
दोनों नेताओं के बीच चर्चा में रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। दोनों पक्षों ने सैन्य आदान-प्रदान और प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने तथा रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और विनिर्माण के लिए अधिक अवसर तलाशने पर सहमति जताई।
भारत और बेल्जियम आतंकवाद तथा संगठित अपराध से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय भी बढ़ाएंगे।
रक्षा और सुरक्षा को द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों सरकारों और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग से सह-विकास और सह-उत्पादन से जुड़ी नई परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं।
आर्थिक संबंधों को भी नई गति देने की तैयारी है। भारत बेल्जियम की कंपनियों की सहायता के लिए निवेश संबंधी त्वरित व्यवस्था स्थापित करने की योजना बना रहा है। वहीं, वाणिज्यिक संपर्क के नियमित माध्यम के रूप में भारत-बेल्जियम बिजनेस फोरम को मजबूत किया जाएगा।
दोनों देश अपने वित्तीय, फिनटेक और नियामक संस्थानों के बीच भी करीबी संबंधों को बढ़ावा देंगे। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के साझा लक्ष्य को हासिल करना है।
इस बीच, रणनीतिक और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भी सहयोग का विस्तार हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोरावर टैंक सहित उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म से जुड़े संयुक्त कार्यों और आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में स्थापित की जा रही हरित अमोनिया परियोजना का उल्लेख किया।
यात्रा के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। भारत और बेल्जियम ने महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। यह कदम मजबूत और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी एक अन्य क्षेत्र है, जिसमें दोनों देशों को बड़ी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बेल्जियम की तकनीकी क्षमताएं भारत के तेजी से विस्तार कर रहे सेमीकंडक्टर उद्योग को सहयोग दे सकती हैं। दोनों देश बेल्जियम स्थित अनुसंधान संगठन आईमेक (imec) को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
दोनों पक्ष स्टार्टअप, समुद्री प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी सहयोग को गहरा करना चाहते हैं। कुशल प्रतिभाओं की भारत और बेल्जियम के बीच आवाजाही को आसान बनाने के उद्देश्य से माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शत्रुता को जल्द समाप्त करने के पक्ष में हैं और संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के समाधान का समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता साझा करते हैं और आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने के संकल्प पर एकजुट हैं।
दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों के योगदान और बलिदान को याद किया।
उन्होंने एंटवर्प के साथ प्रधानमंत्री डी वेवर के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया, विशेष रूप से शहर में बसे भारतीय समुदाय और भारत के साथ उसके प्रमुख हीरा कारोबार संबंधों का।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐतिहासिक हीरा संबंधों से लेकर रक्षा, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग तक, दोनों देश अब एक व्यापक और अधिक समकालीन रणनीतिक साझेदारी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
