फरीदाबाद में हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल) के कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) दीपक गर्ग को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होने पर अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता से सरकारी कार्य करने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरी योजना बनाकर कार्रवाई की और आरोपी अधिकारी को पकड़ लिया।
जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि विभागीय कार्य को आगे बढ़ाने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिकारी द्वारा अवैध धनराशि की मांग की जा रही थी। शिकायत के आधार पर एसीबी ने तथ्यों का सत्यापन किया और इसके बाद ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अधिकारी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद टीम ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, एसीबी ने मौके से आवश्यक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी अपने कब्जे में लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और रिश्वतखोरी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया अपनाई गई। जांच एजेंसी ने अदालत से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की ताकि रिश्वत से जुड़े नेटवर्क और अन्य संभावित तथ्यों का पता लगाया जा सके। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी विभागों में पारदर्शिता बनाए रखने और आम नागरिकों को बिना रिश्वत के सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऐसी कार्रवाइयों को लगातार अंजाम दिया जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद विभाग में भी हलचल मच गई है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच पूरे मामले को लेकर चर्चा बनी हुई है। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां लगातार नागरिकों से अपील करती रही हैं कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित एजेंसी से करें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और शिकायत सही पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ जनसहयोग बेहद जरूरी है और इसी के माध्यम से सरकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है।
