सना (राजीव शर्मा): यमन के हूती आंदोलन ने सऊदी अरब के समर्थन में सेना तैनात करने को लेकर पाकिस्तान और तुर्किए को आगाह किया है। इस चेतावनी ने क्षेत्र में जारी संघर्ष के तेज होने के बीच हाल ही में बने त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को लेकर तनाव और बढ़ा दिया है।
सीएनएन-न्यूज18 से बातचीत में वरिष्ठ हूती अधिकारी मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि यदि इस्लामाबाद और अंकारा की सेनाएं हूती समूह के खिलाफ अभियानों में सीधे तौर पर शामिल होती हैं, तो उन्हें सैन्य जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे किसी भी हस्तक्षेप का जवाब “लोहे की मुट्ठी” (पूरी ताकत) से दिया जाएगा।
यह बयान सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए द्वारा 7 अगस्त को हस्ताक्षरित ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय ध्यान के बीच आया है। इस समझौते के तहत प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा, और यह व्यापक रक्षा सहयोग की रूपरेखा तय करता है।
अंकारा ने रियाद को समर्थन देने के दिए संकेत
हूती विद्रोहियों की यह चेतावनी तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान के उन हालिया बयानों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि तुर्किए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद के लिए तैयार है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फिदान ने सऊदी क्षेत्र पर लगातार हो रहे हूती हमलों के बीच रियाद के साथ अंकारा की एकजुटता व्यक्त की थी।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने ईरान के साथ राजनयिक संपर्क बनाए रखते हुए अधिक सतर्क रुख अपनाया हुआ है। इस्लामाबाद ने तेहरान से सऊदी अरब पर हूती हमलों को रोकने में मदद करने का आग्रह किया है और संकेत दिया है कि यदि रियाद औपचारिक रूप से सहायता मांगता है, तो रक्षा समझौते के तहत उसके दायित्व प्रासंगिक हो सकते हैं।
सामूहिक रक्षा ढांचे के रूप में तैयार किया गया समझौता
हस्ताक्षरकर्ता देशों ने इस समझौते को किसी विशिष्ट देश के खिलाफ बने गठबंधन के बजाय सामूहिक निवारक क्षमता (डिटरेंस) के उद्देश्य से की गई एक रक्षात्मक व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और सामूहिक आत्मरक्षा को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया है।
तीनों देश इस समझौते को संस्थागत रूप देने के लिए कदम उठा चुके हैं। 31 अगस्त को इस्तांबुल में हुई एक बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों तथा सेना प्रमुखों ने सऊदी अरब में एक सचिवालय स्थापित करने और रक्षा क्षमताओं व प्रौद्योगिकी में सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की थी।
सऊदी अरब पर ताजा हमलों के बीच हूती चेतावनी
यह ताजा धमकी ऐसे समय में आई है जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच टकराव तेज हो गया है। सऊदी अधिकारियों ने 19 सितंबर को बताया कि हूतियों द्वारा रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को बीच में ही मार गिराया गया। वहीं हूतियों ने अलग से दावा किया कि उन्होंने रियाद के प्रमुख ठिकानों और सऊदी ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।
इस पृष्ठभूमि में, अल-बुखैती की टिप्पणी का उद्देश्य पाकिस्तान और तुर्किए को सऊदी अरब के लिए केवल कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन से आगे बढ़कर सीधे सैन्य भागीदारी करने से रोकना प्रतीत होता है।
फिलहाल, किसी भी देश की संभावित प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी का दायरा अनिश्चित बना हुआ है, जिससे मक्का रक्षा समझौता इस जटिल होती क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के केंद्र में आ गया है।
