जीरकपुर–पंचकूला बाईपास पर हाईकोर्ट सख्त, नए सर्वे का आदेश; पेड़ों की कटाई रोकने पर जोर

चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को प्रस्तावित जीरकपुर–पंचकूला बाईपास का नया सर्वे करने का निर्देश दिया है और कहा है कि परियोजना आगे बढ़ाने से पहले हर संभावित अलाइनमेंट पर विचार किया जाए। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण किसी स्वतंत्र तकनीकी संस्थान की मदद ले सकता है।

यह निर्देश पर्यावरणीय आधार पर मौजूदा बाईपास अलाइनमेंट को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि विकास परियोजनाएं तभी आगे बढ़नी चाहिए जब पारिस्थितिक नुकसान को कम करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद छिब्बर, जो कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए, ने दलील दी कि मौजूदा अलाइनमेंट में 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मार्ग में थोड़ा बदलाव या वैकल्पिक अलाइनमेंट अपनाने से पेड़ों की कटाई काफी कम की जा सकती है और परियोजना लागत भी घट सकती है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, एक प्रस्ताव में अलाइनमेंट को नदी तल के करीब ले जाने की बात है, जबकि दूसरा पंचकूला में सेक्टर-विभाजक सड़क से बाईपास निकालने का सुझाव देता है। उनका कहना था कि इन विकल्पों से पीर मुच्छल्ला के पास स्थित वन क्षेत्र को बचाया जा सकता है, जिसे उन्होंने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील बताया।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि देश के अन्य हिस्सों में ऐसे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में मार्ग परिवर्तन सफलतापूर्वक किए गए हैं। उनका आरोप था कि मौजूदा डिजाइन एक निजी सलाहकार ने तैयार किया था, लेकिन किसी प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से स्वतंत्र समीक्षा नहीं कराई गई। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि प्रस्तावों की जांच IIT रुड़की जैसे विशेषज्ञ संगठन से कराई जाए।

NHAI की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि प्राधिकरण ने याचिकाकर्ताओं द्वारा सुझाए गए विकल्पों में तकनीकी चुनौतियां पहचानी हैं। हालांकि, प्रस्तुत दलीलों और प्राधिकरण की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले सभी उपलब्ध विकल्पों की फिर से समीक्षा करना उचित होगा।

अदालत ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है और बाईपास के पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

निष्पक्ष समीक्षा के लिए हाईकोर्ट ने कहा कि NHAI पुनः सर्वे करते समय किसी भी प्रतिष्ठित तकनीकी विशेषज्ञ संस्था या निकाय की सहायता ले सकता है। अदालत ने 10 दिनों के भीतर नई रिपोर्ट दाखिल करने और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ताओं को देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को तय की गई है।

यह आदेश हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के चल रहे रुख का हिस्सा है। इसी वर्ष पहले अदालत ने राज्य भर में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई थी, जिसमें जीरकपुर–पंचकूला बाईपास के लिए हटाए जाने वाले पेड़ भी शामिल थे, जब तक कि अदालत से पूर्व अनुमति न ली जाए। खंडपीठ ने हरियाणा के सीमित वन आवरण को लेकर चिंता जताई थी और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में अधिक पर्यावरणीय जिम्मेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया था।

By Gurpreet Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *