5 किमी साइकिल से स्कूल जाने वाली हरजिंदर कौर ने भारत का नाम किया रौशन

जालंधर(गुरप्रीत सिंह): लंबे समय से देश के मशहूर भारोत्तोलकों में शुमार होने से पहले ही हरजिंदर कौर का जीवन परिश्रम, संकल्प और त्याग से भरा रहा है। पंजाब के मेहस गांव में पली-बढ़ी उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों और अनगिनत बाधाओं को पार कर एक ऐसा करियर बनाया जिसने उनके परिवार और राष्ट्र दोनों का सिर गर्व से ऊँचा किया है।

स्कूल की छात्रा रहते हरजिंदर प्रतिदिन गांव से नवाहा तक लगभग पांच किलोमीटर साइकिल चलाकर पढ़ने जाती थीं। यह सफर आसान नहीं था। उनके पिता साहिब याद करते हैं कि अक्सर उनकी साइकिल पंचर हो जाती थी, लेकिन वे कभी शिकायत नहीं करती थीं।

“मुझे आज भी याद है कि वह चुपचाप साइकिल धकेलकर घर तक पहुंचती थीं बजाय मदद मांगने के, क्योंकि उन्हें हमारी आर्थिक स्थिति का एहसास था,” उन्होंने कहा।

अकादमिक पढ़ाई के अलावा हरजिंदर ने परिवार का समर्थन करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे अपने पिता के साथ खेत में काम करतीं, पशुधन के चारे तैयार करने के लिये चाफ़ कट्टर चलाती थीं। बाद में उन्होंने इन शारीरिक मेहनत भरे कामों को अपनी खेल सफलता की नींव में योगदान देने का श्रेय दिया।

उनके भाई प्रतिभाल के अनुसार, हरजिंदर का खेल जीवन कक्षा ग्यारहवीं में शुरू हुआ। उन्होंने पहले कबड्डी खेली, लेकिन उनकी असाधारण शारीरिक ताकत पर कोच परमजीत शर्मा की नज़र पड़ी, जिन्होंने उन्हें रस्साकशी आजमाने के लिये प्रेरित किया। कुछ ही समय बाद वे भारोत्तोलन में आ गईं — एक ऐसा फैसला जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

हालाँकि बदलाव आसान नहीं था। हरजिंदर ने थोड़े समय के लिये खेल छोड़ने पर भी विचार किया था, यह चिंतित होकर कि भारोत्तोलन उनके शरीर के स्वरूप को बदल देगा। उनके माता-पिता उनके साथ दृढ़ रहे।

“हमने उनसे कहा कि ऐसी बातों की चिंता न करें और उस खेल के माध्यम से बेहतर भविष्य बनाने पर ध्यान दें जिसे वह पसंद करती हैं,” उनके पिता ने कहा।

कठोर आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद परिवार ने शिक्षा पर समझौता नहीं किया। प्रतिभाल ने बताया कि उनके पिता हमेशा उन्हें याद दिलाते थे कि पढ़ाई खेलों जितनी ही जरूरी है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उनकी महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने के लिये हर संभव करेंगे, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

शक्ति-आधारित खेल परिवार की परंपरा का हिस्सा रहे हैं। जवानी में साहिब स्वयं गांव स्तर के भारोत्तोलन आयोजनों में भाग लिया करते थे, जिसने हरजिंदर को आत्मविश्वास के साथ इस खेल को अपनाने के लिये प्रेरित किया।

कई वर्षों की दृढ़ता ने परिवार की किस्मत बदल दी है। हरजिंदर अब इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत हैं, वहीं उनके भाई भी रोजगार में हैं। वे संघर्ष जिनसे कभी उनकी पहचान थी, अब स्थिरता और गर्व में बदल चुके हैं।

By Gurpreet Singh

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