भारत में मोतियाबिंद के इलाज में सहायता के लिए ‘फ्रेंड्स फॉर कॉज फाउंडेशन’ ने प्रस्तुत किया ‘द जॉय ऑफ शेयरिंग’

सरे (ऋचा वालिया): ‘फ्रेंड्स फॉर कॉज फाउंडेशन’ (FFCF) द्वारा ‘द जॉय ऑफ शेयरिंग’ (The Joy of Sharing) नामक एक सामुदायिक फंडरेਜ਼ਿੰਗ और जागरूकता कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है। यह आयोजन उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहे जरूरतमंद लोगों को मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन और चश्मे उपलब्ध कराने की निरंतर पहल के समर्थन में आयोजित किया गया है।

यह आयोजन योगेश कुमार भाटिया के नेतृत्व में चलाए जा रहे व्यापक सेवा अभियान का एक हिस्सा है। इस पुनीत कार्य में उनके जुड़ने की शुरुआत उनके छोटे भाई के निधन के बाद हुई, जो मोतियाबिंद से होने वाले अंधेपन की समस्या को लेकर बेहद संवेदनशील थे।

भाटिया 2010 में कनाडा आकर बसे थे। पेशे से केमिकल इंजीनियर भाटिया वाटर ट्रीटमेंट कंसल्टेंट और आरओ प्लांट डिजाइनर के रूप में कार्यरत रहे। अपने भाई के निधन के उपरांत, उन्होंने भारत में मोतियाबिंद से अंधेपन की समस्या और इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ लोगों के सामने आने वाली बाधाओं पर शोध करना शुरू किया।

इस पहल के तहत अत्यंत जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 500 विशाल नेत्र जांच शिविरों (मेगा आई कैंप्स) के माध्यम से अब तक 5,000 से अधिक लोगों के मोतियाबिंद के मुफ्त ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जबकि 30,000 से अधिक लोगों को मुफ्त चश्मे बांटे गए हैं।

ये शिविर मुख्य रूप से उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में लगाए जाते हैं, जिनमें पंजाब के मोगा से लेकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक के क्षेत्र शामिल हैं। भाटिया वर्ष में लगभग तीन महीने इस पूरे क्षेत्र का दौरा करते हैं, ताकि जरूरतमंद बस्तियों तक पहुंचकर सहायता के हकदार लोगों की पहचान की जा सके। आयोजकों ने बताया कि पिछले वर्ष लगभग 1,637 लोगों के मोतियाबिंद के मुफ्त ऑपरेशन करवाए गए थे, जबकि इस वर्ष करीब 2,100 ऑपरेशनों का लक्ष्य रखा गया है।

भाटिया ने मोतियाबिंद के उपचार से होने वाले व्यापक आर्थिक प्रभावों पर भी अध्ययन किया है। संस्था के आंकड़ों का अनुमान है कि एक वर्ष में किए गए मोतियाबिंद के ऑपरेशन 13 वर्षों में 123.4 बिलियन डॉलर की आर्थिक बचत का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं, जिससे समाज को 4,567% का वित्तीय लाभ (रिटर्न) मिलता है।

‘द जॉय ऑफ शेयरिंग’ का उद्देश्य समुदाय के सदस्यों, प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) और समर्थकों को इस नेक कार्य के लिए एक मंच पर लाना है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि एकत्रित की गई दान राशि का 100% हिस्सा केवल और केवल इसी सेवा कार्य में उपयोग किया जाएगा।

नूतन ठाकुर और रचना अरोड़ा द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में नील और वंश द्वारा गणेश वंदना, एफएफसीएफ का परिचय, संस्थापक का संबोधन, प्रायोजकों का सम्मान और चेक प्रस्तुति शामिल है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रकृति और मणि, जीपीएस के साथ इकबाल संधू, ले प्लाजिर डांस एकेडमी, बैंड सिंथेसिस, पीटी डांस एकेडमी और कार्तिक द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिसके उपरांत एक मिनी-कॉन्सर्ट और डांस फ्लोर का आयोजन होगा।

‘द गिफ्ट ऑफ साइट’ (The Gift of Sight) के नाम से प्रसिद्ध यह व्यापक अभियान उन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक मोतियाबिंद के इलाज की पहुंच बनाना चाहता है, जहां आधुनिक चिकित्सा पहुंचना कठिन है और लोग सर्जरी का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। भाटिया के लिए यह कार्य एक व्यक्तिगत क्षति से शुरू होकर रोके जा सकने वाले अंधेपन को दूर करने के एक निरंतर मिशन में तब्दील हो चुका है। ‘फ्रेंड्स फॉर कॉज फाउंडेशन’ कनाडा रेवेन्यू एजेंसी (CRA) द्वारा पंजीकृत एक धर्मार्थ संस्था है। ‘द जॉय ऑफ शेयरिंग’ समुदाय को इस मानवीय पहल से जुड़ने और भारत में इसके निरंतर विस्तार में सहयोग देने का एक सार्थक अवसर प्रदान करता है।

By Rajeev Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *