आखिरकार! डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

आखिरकार! डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

फ्रांस (राजीव शर्मा): आखिरकार, एक बड़ी राहत की खबर है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच नव-हस्ताक्षरित ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ को एक ऐतिहासिक राजनयिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति और व्यापक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

इस समझौता ज्ञापन के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर होने के बाद जारी एक बयान में, शरीफ ने कहा कि यह समझौता सैन्य टकराव के बजाय संवाद और बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए वाशिंगटन और तेहरान दोनों के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने नोट किया कि इस समझौते को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिल चुकी है, और पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ (mediator) की भूमिका निभाई है।

तत्काल प्रभावी होगा समझौता; खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि यह समझौता ज्ञापन तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जिसके पहले चरण में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन उपायों से क्षेत्रीय तनाव को कम करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में विश्वास बहाल करने में मदद मिलेगी।

शरीफ ने राजनयिक जुड़ाव का समर्थन करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की और बातचीत को शांतिपूर्ण परिणाम की ओर ले जाने में मदद करने के लिए अमेरिकी वार्ता दल (negotiating team) को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद ने एक ऐसे संकट को टाल दिया जिसके मध्य पूर्व से परे भी गंभीर परिणाम हो सकते थे।

पाकिस्तानी नेता ने ईरान के नेतृत्व की भूमिका को भी स्वीकार किया और बातचीत को आगे बढ़ाने व शांतिपूर्ण समाधान को अपनाने के लिए वहाँ के शीर्ष अधिकारियों द्वारा दिखाई गई इच्छाशक्ति की सराहना की। उन्होंने पूरी बातचीत के दौरान रचनात्मक भागीदारी और प्रतिबद्धता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तारीफ की।

क्षेत्रीय सहयोगियों और सैन्य नेतृत्व की भूमिका

इसके अलावा, शरीफ ने मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करने वाले कई क्षेत्रीय देशों के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र को उनके राजनयिक जुड़ाव के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उनके सहयोग ने दोनों पक्षों के बीच आम सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को भी विशेष श्रेय दिया गया। शरीफ ने उल्लेख किया कि फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने मध्यस्थता पहल का समर्थन करने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

भविष्य में स्थिरता और आर्थिक प्रगति की उम्मीद

इस समझौते को भविष्य के सहयोग की आधारशिला बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समझौता ज्ञापन में आपसी विश्वास को मजबूत करने और व्यापक क्षेत्र में स्थिरता व आर्थिक प्रगति के एक नए युग को प्रोत्साहित करने की क्षमता है। उन्होंने आशावाद व्यक्त किया कि पक्षों के बीच निरंतर जुड़ाव से प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर व्यापक समझ विकसित होगी।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब वैश्विक ध्यान पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर केंद्रित है, जहां पर्यवेक्षक इस समझौते के कार्यान्वयन और क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं (energy supply chains) व अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसके संभावित प्रभाव पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। यदि इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जाता है, तो यह समझ क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

By Rajeev Sharma

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