फ्लोरेस (राजीव शर्मा): इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप में एक शक्तिशाली भूकंप के बाद रविवार को बचाव दल ढहे हुए मकानों और भूस्खलन के मलबे से लोगों को निकालने के काम में जुटे रहे। इस भीषण आपदा में कम से कम 47 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक घायल हैं, जबकि प्रशासन जीवित बचे लोगों को खोजने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
शनिवार को पूर्वी इंडोनेशिया में आए इस भूकंप ने भारी तबाही मचाई और फ्लोरेस के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। क्षतिग्रस्त सड़कों, अस्थिर जमीन और बिजली व संचार सेवाओं में आई रुकावटों के बीच आपातकालीन दलों द्वारा राहत कार्य जारी रहने के साथ हजारों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
मंग्गराई और पूर्वी मंग्गराई सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार मंग्गराई में 24 और पूर्वी मंग्गराई में 17 मौतें दर्ज की गईं। इसके अलावा सिक्का, न्गादा और एंदे में भी जनहानि की सूचना मिली है।
बचाव दल ढही हुई इमारतों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहाँ अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी अन्य लोग दबे हो सकते हैं।
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी। एजेंसी के अनुसार इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंदे से लगभग 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में, समुद्र में लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
घर क्षतिग्रस्त होने के बाद हजारों लोग आश्रय की तलाश में इस शक्तिशाली झटके ने 900 से अधिक घरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया और सैकड़ों अन्य को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
अधिकारियों का अनुमान है कि लगभग 5,000 निवासियों को अस्थायी आश्रयों में स्थानांतरित किया गया है। कई अन्य लोगों ने घरों के बाहर रहना ही बेहतर समझा, क्योंकि उन्हें डर है कि संभावित आफ्टरशॉक्स (बाद के झटके) पहले से कमजोर ढांचों को गिरा सकते हैं।
स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और चर्चों सहित लगभग 167 सार्वजनिक सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचने की सूचना मिली है।
राहत एजेंसियों ने प्रभावित बस्तियों में पीने का पानी, चावल, तैयार भोजन, कंबल और दवाइयों जैसी बुनियादी जरूरत की चीजें पहुंचानी शुरू कर दी हैं। जिन परिवारों के घर तबाह हो गए हैं या असुरक्षित घोषित किए गए हैं, उनके लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की जा रही है।
भूस्खलन से बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती फ्लोरेस के पहाड़ी इलाकों ने बचाव कार्यों को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बना दिया है। भूकंप से हुए भूस्खलन के कारण ट्रांस-फ्लोरेस राजमार्ग के कई हिस्से बंद हो गए, जिससे कई बस्तियों का सड़क संपर्क टूट गया।
अलगाव में पड़े गांवों से संपर्क बहाल करने के लिए कर्मचारी चट्टानों, मिट्टी और अन्य मलबे को हटाने में जुटे हैं। आपातकालीन अधिकारी बिजली और संचार नेटवर्क को भी दोबारा बहाल करने पर काम कर रहे हैं।
पहले दुर्गम रहे कुछ इलाकों की ओर जाने वाली सड़कों को अब फिर से खोल दिया गया है, जिससे राहत और बचाव दल अधिक निवासियों तक पहुँच पा रहे हैं।
दुर्गम स्थानों पर तलाशी अभियान जारी शुरुआत में बुनियादी ढांचे के नुकसान के कारण बाधित होने के बाद बचाव दलों ने मंग्गराई, पूर्वी मंग्गराई और नागेकियो के कुछ हिस्सों में अभियान फिर से शुरू किया।
दल नष्ट हुए घरों और अन्य ढांचों की जांच कर रहे हैं और भूस्खलन वाले स्थलों पर दबे हो सकने वाले लोगों के संकेतों की तलाश कर रहे हैं।
अधिकारियों ने निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है क्योंकि अस्थिर ढांचे और संभावित आफ्टरशॉक्स अतिरिक्त खतरे पैदा कर रहे हैं।
लाबुआन बाजो में भी महसूस किए गए तेज झटके भूकंप के झटके लाबुआन बाजो में भी महसूस किए गए, जो एक प्रमुख पर्यटन केंद्र और कोमोडो नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार है। व्यापक क्षेत्र में हुए भूस्खलन ने सड़क संपर्कों को प्रभावित किया, जिससे निवासियों और पर्यटकों में चिंता बढ़ गई।
आगे की भूकंपीय गतिविधियों के डर से कई लोग क्षतिग्रस्त इमारतों में लौटने के बजाय रात भर खुले में रहे।
इंडोनेशिया भूकंप के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है—यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं और जहाँ भूकंपीय व ज्वालामुखीय गतिविधियाँ आम हैं।
फ्लोरेस ने पहले भी घातक भूकंपों का सामना किया है। 1992 में आए एक शक्तिशाली भूकंप और सुनामी ने इस द्वीप पर व्यापक तबाही मचाई थी और लगभग 2,500 लोगों की जान ले ली थी।
फिलहाल आपातकालीन दल जीवित बचे लोगों की तलाश, बंद सड़कों को साफ करने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बचाव अभियान द्वीप के अधिक दूरदराज के इलाकों में आगे बढ़ने के साथ ही अधिकारी नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।
