पुंछ (राजीव शर्मा): जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में रविवार को लगातार हुई बारिश उस समय जानलेवा साबित हुई जब अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और भूस्खलन ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि बचाव दल मलबे में दबे होने की आशंका वाले लोगों की तलाश में जुटे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सूरनकोट सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बनकर उभरा है, जहां भारी मूसलाधार बारिश से घरों को नुकसान पहुंचा, सड़कें अवरुद्ध हो गईं और नदी-नाले उफान पर आ गए, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। प्रभावित निवासियों को राहत देने और बचाव अभियान चलाने के लिए आपदा प्रतिक्रिया टीमों, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों को काम पर लगाया गया है।
पीड़ितों में 28 वर्षीय नाजिया कौसर शामिल थीं, जिनकी नूनाबंदी गांव में अपना घर ढह जाने से मौत हो गई। उनके पति और तीन बच्चे इस घटना में जीवित तो बच गए लेकिन उन्हें चोटें आई हैं। उन्हें मलबे से सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लोअर मर्राह में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
लोअर मर्राह में एक और बड़ा बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) चल रहा है, जहां भूस्खलन के कारण एक आवासीय घर मलबे में दफन हो गया। अधिकारियों ने बताया कि मोहम्मद लतीफ और उनके परिवार के पांच सदस्य अभी भी लापता हैं। बचाव उपकरणों से लैस टीमें लापता लोगों का पता लगाने के लिए कठिन परिस्थितियों में काम कर रही हैं।
इस खराब मौसम ने एक नाबालिग लड़की, इरम की भी जान ले ली, जो मरहोट इलाके में एक नाला पार करते समय पानी के तेज बहाव में बह गई। एक अलग घटना में, बचाव कर्मियों ने धुंधक लाथूंग पुल के पास एक नाले से एक अज्ञात महिला का शव बरामद किया है।
प्रशासन ने जारी की सतर्क रहने की चेतावनी
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लगातार हो रही बारिश ने जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में नालों के उफान पर आने, अचानक बाढ़ आने और नए भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ा दिया है। संवेदनशील ढलानों और जल निकायों (नदियों-नालों) के पास रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।
इस आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविरों, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचों की बहाली का काम भी चल रहा है, हालांकि बचाव कार्य अभी भी उनकी पहली प्राथमिकता है।
जिला प्रशासन ने जनता से मौसम की एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करने की अपील की है, क्योंकि पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि मौसम की यह अस्थिर स्थिति जारी रह सकती है, जिससे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में और खतरा बढ़ सकता है।
