चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): सीबीआई ने चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) से जुड़ी कथित ₹82 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भारतीय वन सेवा अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ आठ आरोपों में अभियोजन की मांग की है।
जांच एजेंसी ने सीबीआई अदालत के समक्ष पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि CREST में वरिष्ठ प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां संभालने वाले श्रीवास्तव ने सरकारी धन के डायवर्जन और उसे छिपाने में भूमिका निभाई।
आरोपों में आपराधिक साजिश, लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और खातों में हेराफेरी, आपराधिक कदाचार, अनुचित लाभ लेना, सबूत नष्ट करना, अपराध से अर्जित रकम हासिल करना और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उकसावे के आरोप शामिल हैं।
सीबीआई के अनुसार, श्रीवास्तव CREST के प्रशासनिक और वित्तीय प्रमुख थे तथा CEO/अतिरिक्त CEO के रूप में कार्यरत थे। वह इसके बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी थे। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और ऐसे लेन-देन में मदद की, जिनके माध्यम से CREST का धन डायवर्ट किया गया।
फर्जी दस्तावेज और अनधिकृत लेन-देन के आरोप
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि श्रीवास्तव और आहरण एवं संवितरण अधिकारी के कथित हस्ताक्षरों वाले फर्जी बैंकिंग आवेदन-पत्रों का इस्तेमाल CREST के पंजीकृत ईमेल विवरण में बदलाव के लिए किया गया। एजेंसी ने इन बदलावों को उस अवधि से जोड़ा है, जब सोसाइटी के खातों से कथित फर्जी निकासी शुरू हुई थी।
आरोपपत्र में आगे कहा गया है कि धनराशि CAPCO Fintech Services के माध्यम से भेजी गई और बाद में कथित रूप से श्रीवास्तव से जुड़े संस्थाओं और लोगों तक पहुंची।
एजेंसी द्वारा उल्लेखित एक लेन-देन में CAPCO के खाते से श्रीवास्तव के नाम पर कथित रूप से ₹5 लाख का डिमांड ड्राफ्ट जारी किया गया। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि CAPCO से ₹95 लाख Vipam Consultancy Pvt. Ltd. को हस्तांतरित किए गए। इस कंपनी में श्रीवास्तव की पत्नी अनुपम श्रीवास्तव निदेशक हैं और उनकी 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
CBI ने WhatsApp चैट डिलीट करने का लगाया आरोप
जांच एजेंसी ने श्रीवास्तव पर सबूत नष्ट करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया है। आरोपपत्र के अनुसार, उन्होंने राहुल कुमार और अन्य लोगों के साथ WhatsApp पर हुई बातचीत डिलीट कर दी। इन लोगों का संबंध कथित रूप से डायवर्ट की गई धनराशि की आवाजाही और डिलीवरी से था।
सीबीआई का आगे आरोप है कि संबंधित अवधि में श्रीवास्तव द्वारा इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन नष्ट कर दिया गया, जबकि उसमें मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद थे।
Vipam Consultancy की कथित भूमिका
एक अन्य आरोप Vipam Consultancy Pvt. Ltd. द्वारा कथित रूप से ₹95 लाख प्राप्त किए जाने से संबंधित है। सीबीआई ने दावा किया है कि कंपनी का CREST के साथ कोई वास्तविक कारोबारी लेन-देन नहीं था, फिर भी उसे सोसाइटी के खातों से कथित रूप से डायवर्ट की गई रकम मिली और उसने उसे अपने पास रखा।
एजेंसी का आरोप है कि कंपनी को मिली यह रकम श्रीवास्तव के लिए अनुचित लाभ थी। इस संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि सह-आरोपी रिभव ऋषि से जुड़े लोगों के माध्यम से नकदी और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त किए गए।
चंडीगढ़ पुलिस की FIR से शुरू हुआ मामला
यह मामला 12 मार्च 2026 को चंडीगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR से शुरू हुआ था। FIR में बैंकिंग लेन-देन और काल्पनिक संस्थाओं से जुड़े बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।
जांच CREST की धनराशि को बैंक अधिकारियों और लोक सेवकों की कथित मिलीभगत से शेल संस्थाओं में डायवर्ट किए जाने से संबंधित है। बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया, जिसने जांच जारी रखते हुए पूरक आरोपपत्र दाखिल किया।
आरोपपत्र में लगाए गए आरोप न्यायिक जांच के अधीन हैं। आरोपियों को अदालत के समक्ष इन आरोपों का विरोध करने का अवसर मिलेगा।
