HKRNL पर विपक्ष के सवालों का CM सैनी ने आंकड़ों से दिया जवाब, कांग्रेस के कार्यकाल पर उठाए सवाल

चंडीगढ़(बलविंदर सिंह): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने HKRNL पर विपक्ष को करारा जवाब देते हुए कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के गठन के माध्यम से प्रदेश सरकार ने दशकों पुरानी ठेकेदार आधारित कर्मचारी व्यवस्था में व्याप्त बिचौलियापन, दलाली, शोषण और अपारदर्शिता को खत्म कर इसे पारदर्शी, उत्तरदायी और कर्मचारी-केंद्रित बनाया है। पहले ठेकेदारों द्वारा युवा कर्मचारियों का बड़े स्तर पर शोषण होता था। कर्मचारियों को पूरा वेतन तक नहीं मिलता था और बीच में ठेकेदार कट लगा देते थे। यहां तक कि कर्मचारियों को 12 महीनों के स्थान पर 11 महीनों का वेतन यह कहकर दिया जाता था कि उनकी भर्ती का रिन्यूअल किया जा रहा है। सरकार ने ठेकेदार और बिचौलिए की भूमिका समाप्त कर व्यवस्था को नियम, योग्यता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री सोमवार को हरियाणा विधानसभा में हरियाणा कौशल रोजगार निगम के संबंध में लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष इस विषय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दृष्टिकोण से देख रहा है, जबकि सरकार इसे प्रदेश के युवाओं, कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों से जोड़कर देखती है। विपक्ष इतिहास के अधूरे पन्ने दिखाकर राजनीति कर रहा है। पूरा रिकॉर्ड सामने आएगा तो सच यही निकलेगा कि अस्थायी और अनुबंध आधारित व्यवस्था वर्तमान सरकार ने शुरू नहीं की। सरकार ने इसमें व्याप्त ठेकेदारी, बिचौलियापन, दलाली, शोषण और अपारदर्शिता को खत्म कर व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और कर्मचारी-केंद्रित बनाया है।

झूठ बोलने और भ्रम फैलाने में विपक्ष सबसे आगे, हवा से भी तेज फैलाते हैं झूठ

मुख्यमंत्री ने कहा कि झूठ बोलने और भ्रम फैलाने में कांग्रेस के लोग सबसे आगे हैं। ये हवा से भी तेज गति से झूठ फैलाने का काम करते हैं। प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है और सच तथा झूठ के अंतर को भली-भांति समझती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का तो ऐसा था कि चुनाव आ गया तो ये लोग वोटों के हिसाब से सरकार चलाते थे। चुनाव आते ही वोटों का हिसाब लगाया जाता था और उसी के अनुरूप सरकार तथा व्यवस्था को चलाया जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे इस बात की चिंता है कि कांग्रेस के विधायक उस व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं, जो इनके शासनकाल में दम तोड़ चुकी थी और दलदल में फंस गई थी। हमारी सरकार ने उस व्यवस्था को ठीक करने का काम किया है। यह भी चिंता का विषय है कि विपक्ष के सदस्य उसी दफ्तर के आगे जाकर बैठ गए, जहां हमारी सरकार ने व्यवस्था को दुरुस्त किया है।

उन्होंने कहा कि मेरा आग्रह है कि विपक्ष ने जो प्रश्न उठाए हैं और जो चिंताएं व्यक्त की हैं, उस पर मेरे जवाब को पूरा सुनें। शायद श्री भारत भूषण बत्रा बता पाएं कि उस समय युवाओं के साथ धोखा क्यों हुआ और युवाओं की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हुआ। उनके शासनकाल में ठेकेदारी प्रथा के तहत युवाओं का इतने बड़े स्तर पर शोषण होता था।

वर्ष 1967 में भी थे 11,397 कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाले कर्मचारी

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा गठन के बाद वर्ष 1967 के प्रारंभिक आंकड़ों को देखें तो 31 मार्च, 1967 को हरियाणा सरकार के कर्मचारियों की कुल संख्या 97,385 थी। इनमें कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाले 11,397 कर्मचारी शामिल थे। यानी हरियाणा के आरंभिक प्रशासनिक ढांचे में लगभग 88 प्रतिशत कर्मचारी क्लास-एक से क्लास-चार की मुख्य श्रेणियों में थे और लगभग 12 प्रतिशत कर्मचारी कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी में थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 तक क्लास-एक से क्लास-चार तक के कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2,55,319 हो गई, जबकि कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी की संख्या बढ़कर 84,642 हो गई। यानी वर्ष 1967 की तुलना में इस संयुक्त श्रेणी में 73,245 कर्मचारियों की वृद्धि हुई और यह संख्या बढ़कर लगभग 7.4 गुणा हो गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में अनुबंध आधारित कर्मचारियों की संख्या बढ़कर एक लाख से भी अधिक हो गई। इन ऐतिहासिक आंकड़ों को सामने रखने का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अस्थायी प्रकृति की कर्मचारी व्यवस्था हरियाणा कौशल रोजगार निगम के गठन के बाद पैदा नहीं हुई। यह व्यवस्था दशकों से चली आ रही थी और अलग-अलग सरकारों के समय लगातार विस्तारित हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है कि मानो संविदात्मक रोजगार की शुरुआत हरियाणा कौशल रोजगार निगम से ही हुई हो, जबकि वर्ष 1967 से उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड इस दुष्प्रचार को पूरी तरह नकारता है।

कांग्रेस के 9 वर्षों में संयुक्त श्रेणी में करीब 71 हजार कर्मचारियों की हुई वृद्धि

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1967 से 2005 तक 38 वर्षों में कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी की संख्या 11,397 से बढ़कर 38,949 हुई। लेकिन कांग्रेस सरकार के अगले 9 वर्षों, वर्ष 2005 से 2014 के दौरान यह संख्या 38,949 से बढ़कर लगभग 1 लाख 10 हजार तक पहुंच गई। यानी 38 वर्षों में इस श्रेणी में 27,552 कर्मचारियों की वृद्धि हुई, जबकि कांग्रेस के मात्र 9 वर्षों में लगभग 71 हजार की वृद्धि हुई। आज इन्हें संविदात्मक व्यवस्था सबसे बड़ी समस्या दिखाई दे रही है, जबकि इनके ही कार्यकाल में इसके विस्तार की रफ्तार कई गुणा बढ़ी थी।

उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि कांग्रेस के मात्र 9 वर्षों में लगभग 71 हजार कर्मचारी क्यों बढ़ाए गए? इन कर्मचारियों को ठेकेदारों के भरोसे क्यों छोड़ा गया? ईपीएफ, ईएसआई, समान वेतन, प्रसूति अवकाश, अनुकम्पा तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्थित नीति उस समय क्यों नहीं बनाई गई?

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या वर्तमान सरकार से पहले प्रदेश में पिछले 47 वर्षों तक संविदात्मक कर्मचारी थे या नहीं? सरकारी रिकॉर्ड बताता है कि ऐसी व्यवस्था हरियाणा के गठन से ही मौजूद रही है। वास्तविक प्रश्न यह है कि कर्मचारी ठेकेदार की मनमर्जी पर निर्भर रहेगा या उसे पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह व्यवस्था मिलेगी। हमारी सरकार ने दशकों पुरानी इस व्यवस्था से ठेकेदार और बिचौलिए की भूमिका हटाकर हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से इसे नियम, योग्यता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा है।

नौकरी, वेतन और पीएफ तक के लिए ठेकेदार पर निर्भर थे कर्मचारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था में पारदर्शिता की गंभीर कमी थी। वर्ष 2013 में सामने आई मीडिया रिपोर्टों में हरियाणा में ठेकेदारों के माध्यम से रोजगार पाने वाले युवाओं द्वारा रिश्वत दिए जाने के आरोपों का उल्लेख किया गया था। इसी दौरान दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े एक मामले में एक ठेकेदार ने कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की राशि काटकर भी उसे उनके खातों में जमा नहीं किया था। इसी प्रकार ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों के भविष्य निधि अंशदान जमा न करने, वेतन पर्चियां उपलब्ध न करवाने और यहां तक कि पीएफ नंबर तक जारी न करने की शिकायतें भी सामने आई थीं।

उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था में नौकरी के लिए ठेकेदार के दरवाजे पर जाना पड़े, वेतन के लिए उसकी मर्जी देखनी पड़े और अपने पीएफ के लिए भी उसके पीछे घूमना पड़े, उस व्यवस्था को कर्मचारी-हितैषी कैसे कहा जा सकता है?

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इसी पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से तकनीक-सक्षम और पारदर्शी प्रणाली लागू की, जिसमें युवाओं की योग्यता को सम्मान दिया गया है। अब युवा स्वयं निगम के पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं और निर्धारित पात्रता एवं योग्यता के अनुसार उनकी तैनाती की जाती है। इसके लिए ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल ठेकेदार को हटाना नहीं था, बल्कि उस पूरी अव्यवस्था को समाप्त करना था, जिसमें एक युवा की योग्यता और उसके रोजगार के बीच कोई बिचौलिया खड़ा होता था। अब किसी युवा को किसी ठेकेदार के पास जाने, बिचौलिया ढूंढने या किसी से सिफारिश करवाने की आवश्यकता नहीं है।

समान श्रेणी के कार्य के लिए समान एवं पारदर्शी पारिश्रमिक सुनिश्चित

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्याओं में कर्मचारियों के वेतन में एकरूपता का अभाव और भुगतान में देरी शामिल थी। अलग-अलग विभागों और ठेकेदारों के माध्यम से तैनात कर्मचारियों को निर्धारित डीसी दरों के अनुसार भुगतान नहीं मिलता था। कहीं वेतन में देरी होती थी तो कहीं निर्धारित दर से कम भुगतान की शिकायत आती थी। कई बार एक जैसा काम करने वाले दो कर्मचारियों का वेतन केवल इसलिए अलग होता था क्योंकि उनके ठेकेदार अलग-अलग थे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में अकुशल कर्मचारी के लिए निर्धारित दर लगभग 2,343 रुपये प्रतिमाह थी, जो जुलाई 2014 तक बढ़कर लगभग 5,640 रुपये प्रतिमाह हुई। दरों में वृद्धि अवश्य हुई, लेकिन अलग-अलग समय पर अलग-अलग डीसी दरों, संशोधनों और ठेकेदारों के माध्यम से भुगतान के कारण वेतन व्यवस्था में एकरूपता एवं पारदर्शिता बड़ी चुनौती बनी रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम की स्थापना से इस समस्या का समाधान हुआ। निगम बनने के बाद 19 जनवरी, 2022 से समान वेतन दरें लागू की गईं। अलग-अलग डीसी दरों के स्थान पर एक मानकीकृत वेतन ढांचा बनाया गया। इससे समान श्रेणी के कार्य के लिए समान एवं पारदर्शी पारिश्रमिक सुनिश्चित करने, वेतन संबंधी असमानता कम करने और वेतन निर्धारण तथा भुगतान को व्यवस्थित बनाने का काम किया गया।

उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल, 2026 से हरियाणा श्रम विभाग द्वारा लागू दरों के अनुसार अकुशल कर्मचारी के लिए 15,220 रुपये 71 पैसे, अर्धकुशल कर्मचारी के लिए 16,780 रुपये 74 पैसे तथा कुशल कर्मचारी के लिए 18,500 रुपये 81 पैसे प्रतिमाह की श्रम दरें लागू हैं। वर्ष 2014 में अकुशल कर्मचारी की 5,640 रुपये की दर की तुलना में आज की दर लगभग 2.7 गुणा हो चुकी है।

1,316 डी.डी.ओ. शिफ्टिंग के मामले स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में संविदा कर्मचारी के स्थानांतरण अथवा डी.डी.ओ. शिफ्टिंग के लिए कोई व्यवस्थित और पारदर्शी संस्थागत तंत्र नहीं था। कर्मचारी अपने ठेकेदार और तैनाती के स्थान पर पूरी तरह निर्भर रहता था। इससे प्रशासन के लिए आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों का युक्तिकरण करना कठिन था और कर्मचारियों के लिए भी स्थान परिवर्तन की कोई व्यवस्थित सुविधा नहीं थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम ने पहली बार संविदा कर्मचारियों के लिए डी.डी.ओ. शिफ्टिंग अथवा स्थानांतरण का व्यवस्थित प्रावधान किया। अब प्रशासनिक आवश्यकता होने पर संबंधित विभागाध्यक्ष की सिफारिश और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार कर्मचारी को स्थानांतरित किया जा सकता है। अब तक डी.डी.ओ. शिफ्टिंग के 1,316 मामले स्वीकृत किए जा चुके हैं।

306 पात्र अभ्यर्थियों को अनुकम्पा आधार पर रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार की पीड़ा को भी सरकार ने समझा है। पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था में संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों के लिए ऐसी कोई व्यवस्थित अनुकम्पा तैनाती नीति उपलब्ध नहीं थी, जिसके माध्यम से परिवार के किसी पात्र सदस्य को रोजगार का सहारा मिल सके। उन्होंने कहा कि ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ के खंड 12 के तहत अनुकम्पा तैनाती का प्रावधान किया गया है। अब तक 306 पात्र अभ्यर्थियों को अनुकम्पा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। इसके अलावा कर्मचारी के परिवार को 3 लाख रुपये अनुकम्पा सहायता अथवा अनुकम्पा तैनाती में से एक चुनने का विकल्प दिया गया है।

महिला संविदा कर्मचारियों के लिए प्रसूति एवं अन्य अवकाशों का प्रावधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पुरानी ठेकेदार व्यवस्था में संविदा महिला कर्मचारियों की प्रसूति छुट्टी और अन्य अवकाशों के संबंध में कोई समान, स्पष्ट एवं संस्थागत व्यवस्था नहीं थी। उन्हें अपने वैधानिक लाभों के लिए ठेकेदार पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम की स्थापना के बाद पात्र महिला संविदा कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा एक कैलेंडर वर्ष में 10 चिकित्सा अवकाश और 10 आकस्मिक अवकाश देने का प्रावधान है। महिला कर्मचारियों को 22 दिन आकस्मिक अवकाश का लाभ दिया जा रहा है।

ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि को व्यवस्थित निगरानी व्यवस्था से जोड़ा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैधानिक अंशदान के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन हुआ है। पुरानी व्यवस्था में ईपीएफ, ईएसआई और अन्य वैधानिक अंशदानों की समयबद्ध एवं सही अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी और समान निगरानी तंत्र नहीं था। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम ने ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि को एक व्यवस्थित निगरानी व्यवस्था से जोड़ा है। वर्तमान व्यवस्था में ईपीएफ के अंतर्गत 15 हजार रुपये प्रतिमाह की लागू वैधानिक वेतन सीमा तक कर्मचारी का अंशदान वेतन का 12 प्रतिशत तथा नियोक्ता का अंशदान 13 प्रतिशत जमा किया जाता है। इसी प्रकार ईएसआई के तहत 21 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन तक वाले कर्मचारी का अंशदान अर्जित वेतन का 0.75 प्रतिशत और नियोक्ता का अंशदान 3.25 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 मई, 2026 को अधिसूचना जारी कर श्रम कल्याण निधि में कर्मचारी का अंशदान अर्जित वेतन का 0.2 प्रतिशत, अधिकतम 35 रुपये, जबकि नियोक्ता का अंशदान कर्मचारी के अंशदान की दोगुनी राशि तय की गई है। इस प्रकार संविदात्मक रोजगार को केवल वेतन तक सीमित न रखकर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा गया है।

लगभग 2,100 करोड़ रुपये ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा

मुख्यमंत्री ने बताया कि निगम ने वित्त वर्ष 2022-23 में 288 करोड़ 46 लाख रुपये ईपीएफ, 47 करोड़ 2 लाख रुपये ईएसआई और 4 करोड़ 30 लाख रुपये श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए। वित्त वर्ष 2023-24 में 453 करोड़ 16 लाख रुपये ईपीएफ, 63 करोड़ 16 लाख रुपये ईएसआई और 11 करोड़ 23 लाख रुपये श्रम कल्याण निधि जमा की गई। वित्त वर्ष 2024-25 में 487 करोड़ 88 लाख रुपये ईपीएफ, 59 करोड़ 82 लाख रुपये ईएसआई और 12 करोड़ 7 लाख रुपये श्रम कल्याण निधि जमा की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में 497 करोड़ 13 लाख रुपये ईपीएफ, 46 करोड़ 16 लाख रुपये ईएसआई और 12 करोड़ 81 लाख रुपये श्रम कल्याण निधि जमा की गई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 30 जून, 2026 तक 129 करोड़ 94 लाख रुपये ईपीएफ और 10 करोड़ 17 लाख रुपये ईएसआई जमा किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से अब तक लगभग 2,100 करोड़ रुपये ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए जा चुके हैं। हमारे समय में एक भी कर्मचारी ऐसा नहीं मिलेगा, जिसका ईपीएफ न कटा हो और उसके खाते में न गया हो। उन्होंने विपक्ष से कहा कि उनके वक्त में कितने कर्मचारियों का ईपीएफ कटा था, इसका रिकॉर्ड लाकर दिखाएं।

ठेकेदार कमीशन की तुलना में लगभग 78.56 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में ठेकेदार आमतौर पर कुल बिल राशि पर 2 प्रतिशत कमीशन लेते थे। बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती होने पर यह छोटा दिखाई देने वाला प्रतिशत भी सरकार पर भारी वित्तीय बोझ बनता था। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम द्वारा केवल 0.5 प्रतिशत निगम शुल्क लिया जाता है। यह शुल्क भी निगम का खर्च चलाने के लिए लिया जाता है, क्योंकि सरकार निगम को अलग से कोई बजट नहीं देती। उन्होंने बताया कि निगम की स्थापना से अब तक संबंधित संस्थाओं से 81 करोड़ 44 लाख रुपये निगम शुल्क के रूप में प्राप्त हुए हैं। यदि इसी आधार पर पुरानी ठेकेदार व्यवस्था के तहत 2 प्रतिशत कमीशन दिया जाता तो लगभग 160 करोड़ रुपये ठेकेदार कमीशन के रूप में देने पड़ते। इस प्रकार सरकार को लगभग 78 करोड़ 56 लाख रुपये की वित्तीय बचत हुई है।

ईएसआईसी और चिरायु योजना के माध्यम से संविदा कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए भी ठोस व्यवस्था की गई है। पुरानी ठेकेदार व्यवस्था में चिकित्सा लाभ इस बात पर निर्भर करते थे कि संबंधित ठेकेदार ईएसआई सहित वैधानिक दायित्वों का पालन करता है या नहीं। ठेकेदार द्वारा अनुपालना न करने पर कर्मचारी और उसके परिवार को चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त करने में कठिनाई होती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले संविदा कर्मचारियों को ईएसआईसी के माध्यम से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रावधान है। इससे अधिक वेतन वाले संविदा कर्मचारियों को चिरायु योजना के माध्यम से भी स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण नीति के क्रियान्वयन के संबंध में भी निगम ने बड़ा सुधार किया है। ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण प्रावधानों का समान और निरंतर पालन सुनिश्चित नहीं हो पाता था। इसके कारण आरक्षित श्रेणियों के पात्र अभ्यर्थियों को उचित अवसर से वंचित रहना पड़ता था।

By Balwinder Singh

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