सुरक्षा खतरे का हवाला देकर हाईकोर्ट ने बेअंत सिंह के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया

चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के बेटे तेज प्रकाश सिंह के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास में लगातार रहने को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज कर दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों के सरकारी आवास अपने पास बनाए रखने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सामान्य निर्देशों के आधार पर सुरक्षा कारणों से तेज प्रकाश सिंह को आवास में रहने देने के प्रशासन के फैसले पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि खतरे के आकलन और खुफिया सूचनाओं पर विचार करने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने “सोच-समझकर फैसला” लिया था। अदालत के अनुसार, यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दायरे में आने वाले मामलों से अलग है।

सुरक्षा आकलन में आतंकी संगठनों से खतरे का उल्लेख
अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन के हलफनामे पर ध्यान दिया, जिसमें कहा गया था कि बेअंत सिंह की “आतंकवादी हमले में हत्या की गई थी” और उनके परिवार को अब भी सुरक्षा संबंधी खतरे हैं।

पीठ के समक्ष यूटी के अतिरिक्त स्थायी वकील अभिनव सूद ने अधिवक्ता सय्यम गर्ग के साथ 6 अक्टूबर का हलफनामा दाखिल किया। उसमें कहा गया कि हाउस अलॉटमेंट कमेटी ने सेक्टर 5 स्थित आवास में तेज प्रकाश सिंह के लगातार रहने के मामले पर विचार किया था।

इस मामले में 6 जून को जारी पत्र में चंडीगढ़ और पंजाब क्षेत्र में हाल के ग्रेनेड हमलों और आतंकी घटनाओं, चरमपंथी संगठनों के फिर सक्रिय होने, लगातार मिल रही धमकी भरी कॉल, सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे विरोधी अभियानों और परिवार के खिलाफ जारी शत्रुतापूर्ण मंशा दर्शाने वाली खुफिया सूचनाओं का उल्लेख था। पत्र में मौजूदा आवास से स्थानांतरण की स्थिति में पैदा हो सकने वाली “संचालन संबंधी सुरक्षा कमजोरी” की आशंका भी जताई गई थी।

पत्र के अनुसार, संयुक्त सुरक्षा समिति ने परिवार के निवास के लिए इस घर को “रणनीतिक रूप से उपयुक्त और सुरक्षा की दृष्टि से उचित” बताया था। समिति ने मौजूदा सुरक्षा तैनाती और ढांचे को संतोषजनक पाया, हालांकि अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की थी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश इस मामले पर लागू नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी आवास में न बने रहें। पीठ ने माना कि इन सामान्य निर्देशों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि तेज प्रकाश सिंह को आवास में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती—खासकर तब, जब यूटी प्रशासन ने अपना फैसला लेने से पहले खतरे के आकलन और खुफिया सूचनाओं पर विचार किया था।

पीठ ने कहा कि प्रशासन ने पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आवास का आवंटन रद्द किया था, लेकिन आवंटी से अभ्यावेदन मिलने और खुफिया सूचनाओं की समीक्षा के बाद मामले पर दोबारा विचार किया।

पहले के आवंटन-रद्द करने के आदेश को लागू कराने की मांग वाली अर्जी में कोई दम न पाते हुए अदालत ने उसे खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि यह मामला “स्पष्ट रूप से अलग” है और “शीर्ष अदालत द्वारा जारी निर्देशों के दायरे में नहीं आता।”

मरम्मत में देरी पर मुख्य अभियंता से जवाब मांगा
इससे जुड़ी जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के मुख्य अभियंता से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह “स्पष्ट रूप से बताने” को कहा कि हाईकोर्ट कर्मचारियों को आवंटित सरकारी आवासों में जरूरी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।

पीठ ने निर्देश दिया कि आवश्यक मरम्मत “प्राथमिकता के आधार पर” कराई जाए और इस बारे में अदालत को तुरंत सूचित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।

By Gurpreet Singh

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