नई दिल्ली(राजीव शर्मा): केंद्र ने संकेत दिया है कि चालू संसद सत्र में सीमांकन और महिला आरक्षण (33% आरक्षण) से जुड़ा कोई विधेयक लाने पर विचार किया जा सकता है, साथ ही विपक्ष को आश्वासन दिया है कि कोई भी अतिरिक्त कार्यसूची होने पर उन्हें पहले बताया जाएगा।
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिज्जू ने कहा कि यदि सरकार आधिकारिक एजेंडे में शामिल बिलों के अलावा कोई अन्य प्रस्ताव लाने का निर्णय करती है तो पारदर्शिता बरती जाएगी। उन्होंने बताया कि संसद के वर्तमान कार्यक्रम में आठ बिल सूचीबद्ध हैं, लेकिन अतिरिक्त प्रस्ताव लाने की स्थिति में विपक्ष के नेता पहले ही सूचित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल को हैरान करने का इरादा नहीं रखती।
यह बयान उस चर्चा के बीच आया है जिसमें सीमांकन के साथ-साथ लोकसभा और राज्य विधायिका में महिलाओं के 33% आरक्षण को लागू करने से जुड़ा नया विधेयक लाने की संभावनाओं पर राजनीति चल रही है।
कांग्रेस की सीमांकन पर अलग सर्वदलीय बैठक की मांग के जवाब में रिजिज्जू ने कहा कि हर राजनीतिक दल को अपनी राय रखने का अधिकार है, पर किसी एक दल द्वारा सरकार की कार्यप्रणाली तय नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि चिंताओं को उठाने और बहस के लिए संसद उपयुक्त मंच है।
वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया की प्रमुख पार्टियों में से एक DMK ने कहा कि वह केन्द्र द्वारा पेश किसी भी नए ड्राफ्ट का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम रुख तय करेगी। DMK के राज्यसभा नेता त्रिची शिवा ने कहा कि उनकी मुख्य चिंता यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य के किसी भी सीमांकन में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम न हो। उन्होंने कहा कि यदि प्रस्ताव से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घटने का जोखिम है तो मौजूदा सीमांकन फ्रीज को 25 साल के लिए आगे बढ��ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सीमांकन का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है, खासकर दक्षिणी राज्यों में यह चिंता है कि जनसंख्या आधारित सीटों के पुनर्विभाजन से उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है, भले ही उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की हो।
सरकार की संभावित कार्रवाई के संकेत के साथ यह विषय वर्तमान संसद सत्र के दौरान प्रमुख राजनीतिक बहसों में से एक बनने की संभावना रखता है।
