रोहतक: हरियाणा के रोहतक जिले के सांपला थाने में तैनात एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान एएसआई दीनबंधु के रूप में हुई है। उस पर डबल मर्डर केस में आरोपी युवक को राहत दिलाने और उसके साथ कम मारपीट करने के बदले 50 हजार रुपये मांगने का आरोप है। एसीबी ने उसे थाने के अंदर ही 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। कार्रवाई के समय थाना प्रभारी (SHO) बाहर बैठे थे और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी।
शिकायतकर्ता सुभाष ने एसीबी को बताया कि उसके बेटे नितेश और उसके दोस्त के खिलाफ सांपला थाने में दोहरे हत्याकांड का मामला दर्ज है। आरोप है कि जांच अधिकारी एएसआई दीनबंधु ने केस में राहत देने और बेटे व उसके दोस्त के साथ मारपीट कम करने के बदले 50 हजार रुपये मांगे थे। शिकायत के मुताबिक, आरोपी पुलिसकर्मी पहले ही 40 हजार रुपये ले चुका था। बाकी 10 हजार रुपये लेते समय एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
एसीबी ने शिकायत की जांच के बाद थाने में ट्रैप लगाया। टीम ने केमिकल लगे नोटों के जरिए कार्रवाई की और एएसआई को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जिस दोहरे हत्याकांड की जांच एएसआई दीनबंधु को सौंपी गई थी, उसमें दिल्ली में रहने वाले संदीप और उसकी लिव-इन पार्टनर कविता के शव झज्जर जिले में एनसीआर नहर से बरामद हुए थे। पुलिस जांच के अनुसार, दोनों की हत्या कर शव नहर में फेंके गए थे। इस मामले में रोहतक के हसनगढ़ निवासी नितेश उर्फ मोडिस और नितेश उर्फ बच्चा को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर हत्या का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, मृतक संदीप और कविता के शव मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि संदीप अपनी दुकान बंद करने के बाद दिल्ली के नेब सराय इलाके में कविता के साथ रहने लगा था। सितंबर के अंत में दोनों रोहतक आए थे, जिसके बाद उनका संपर्क टूट गया। परिजनों की तलाश के दौरान उनके शव नहर से बरामद हुए। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच आगे बढ़ाई थी।
अब इसी मामले की जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप में एएसआई की गिरफ्तारी हुई है। एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। रिश्वत लेने और मामले में राहत देने के आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद होगा।
