अमृतसर (गुरप्रीत सिंह): असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को अमृतसर की एक अदालत ने अपनी बीमार दादी से वीडियो कॉल के जरिए बात करने की अनुमति दे दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरिंदर सिंह ने अमृतपाल की कानूनी टीम द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें हाल ही में अस्पताल में भर्ती कराई गईं उनकी दादी से मिलने की अनुमति मांगी गई थी।
अमृतपाल के वकील ऋतुराज सिंह के अनुसार, अदालत ने जेल में बंद सांसद को 7 अक्टूबर से पांच दिनों के भीतर एक बार वीडियो कॉल करने की इजाजत दी है। यह बातचीत अधिकतम 10 मिनट की होगी।
शुरुआत में कानूनी टीम ने अंतरिम जमानत की मांग की थी ताकि अमृतपाल अपनी दादी से व्यक्तिगत रूप से मिलने जा सकें। हालांकि, याचिका लंबित रहने के दौरान ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
परिस्थितियों में आए बदलाव को देखते हुए अदालत ने व्यक्तिगत मुलाकात की जगह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की अनुमति देना उचित समझा।
उनके वकील ने कहा, “हमने अमृतपाल की दादी, जो अस्वस्थ थीं और अस्पताल में भर्ती थीं, उनसे मिलने के लिए अंतरिम जमानत की मांग करते हुए एक अर्जी दाखिल की थी।” उन्होंने आगे बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अदालत ने 10 मिनट की वीडियो बातचीत की अनुमति प्रदान की।
2023 से डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं अमृतपाल
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद अमृतपाल सिंह अप्रैल 2023 से डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद हैं। यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों में निवारक हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) की अनुमति देता है।
पंजाब पुलिस द्वारा उनके और उनके संगठन के सदस्यों के खिलाफ बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान के बाद उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
एनएसए के तहत उनकी हिरासत की अवधि अप्रैल 2026 में समाप्त हो गई थी। हालांकि, इसके तुरंत बाद उनकी रिहाई नहीं हो सकी।
पंजाब पुलिस ने इसके बाद उन्हें अजनाला थाने में हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया। यह मामला उस घटना से संबंधित है जिसमें 2023 में उनके समर्थकों की भारी भीड़ अजनाला थाने में दाखिल हुई थी। अमृतपाल इस मामले में अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पंजाब से दूर डिब्रूगढ़ जेल में ही रखे जाने की अनुमति देने संबंधी आदेश पारित किए हैं।
फिलहाल, अदालत के इस ताजा आदेश ने लोकसभा सदस्य को उनकी दादी के स्वास्थ्य को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच उनसे डिजिटल माध्यम से बातचीत करने का अवसर दिया है।
