अल्बर्टा जनमत संग्रह पर 100 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च, उठे सवाल

कैलगरी (राजीव शर्मा): 19 अक्टूबर 2026 को होने वाले अल्बर्टा के 10 सवालों वाले जनमत संग्रह से पहले प्रांतीय स्तर पर होने वाले मतदान पर सार्वजनिक धन खर्च किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आर्थिक अनिश्चितता के बीच करदाताओं द्वारा यह पूछे जाने लगा है कि इतना बड़ा खर्च कितना उचित है।

यह जनमत संग्रह प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से एक बड़ा आयोजन है। इलेक्शंस अल्बर्टा को व्यापक स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति, लॉजिस्टिक्स और मतगणना की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि अंतिम लागत अभी तय नहीं हुई है, लेकिन अनुमानित खर्च 100 मिलियन डॉलर से अधिक बताया जा रहा है। इसे लेकर पारदर्शिता और करदाताओं के पैसे से किए जा रहे खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है।

अल्बर्टा एनडीपी के नेता नाहिद नेनशी ने जनमत संग्रह से जुड़े सरकारी खर्च की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या करदाताओं के पैसे से जारी सरकारी संचार मतदाताओं को निष्पक्ष जानकारी दे रहे हैं या किसी राजनीतिक संदेश को बढ़ावा दे रहे हैं। यूनाइटेड कंजर्वेटिव सरकार का कहना है कि मतदाताओं को जटिल मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है।

खर्च को लेकर यह बहस ऐसे समय में हो रही है, जब अल्बर्टा के परिवार, कारोबारी और पेशेवर महंगाई, बढ़ती परिचालन लागत और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं। करदाताओं के लिए सवाल सिर्फ जनमत संग्रह के सवालों के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि यह भी है कि सार्वजनिक धन खर्च करना प्रांतीय कर राशि का जिम्मेदार उपयोग है या नहीं।

सरकार का तर्क है कि जनमत संग्रह में ऐसे मुद्दे शामिल हैं, जिनका अल्बर्टा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मतदाताओं को जानकारी देना सरकार की वैध सार्वजनिक जिम्मेदारी है। आलोचकों का कहना है कि सरकारी संचार पूरी तरह तथ्यात्मक होना चाहिए और करदाताओं को जनमत संग्रह से जुड़े सभी खर्चों का पूर्ण विवरण मिलना चाहिए।

मतपत्र में आव्रजन, मतदाता पहचान, प्रांतीय कार्यक्रमों, संवैधानिक मुद्दों और कनाडा से अलग होने को लेकर भविष्य में बाध्यकारी जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करने से जुड़े सवाल शामिल हैं।

19 अक्टूबर को होने वाले मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही खर्च का मुद्दा व्यापक राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। अल्बर्टावासियों का अधिकार है कि वे पूछें कि जनमत संग्रह पर अंततः कितना खर्च होगा, धन कहां खर्च किया जा रहा है और क्या प्रत्येक खर्च आवश्यक तथा सार्वजनिक रूप से जवाबदेह है।

करदाताओं के सामने मूल प्रश्न यही है कि 100 मिलियन डॉलर से अधिक का अनुमानित खर्च लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जरूरी निवेश है या आर्थिक अनिश्चितता के दौर में अधिक वित्तीय संयम की अपेक्षा की जानी चाहिए।

नेशनल टाइम्स अल्बर्टा जनमत संग्रह की लागत, सरकारी खर्च और उठाए जा रहे जवाबदेही संबंधी सवालों की पड़ताल जारी रखेगा।

By Rajeev Sharma

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