CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत पर रोक

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए और लागू कानूनों तथा यातायात नियमों के अधीन दिल्ली में लोगों की आवाजाही बाधित न हो। ये निर्देश सीजेपी मुद्दे से जुड़े 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस प्रतिबंधों और कथित अत्याचारों को लेकर उठी चिंताओं के बीच आए।

न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने रविवार की विशेष सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किए और जोर दिया कि सार्वजनिक सभाओं व आवाजाही पर प्रतिबंध कानून के ढांचे के भीतर ही लागू होने चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा अवैध हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू नहीं है, वहां शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जानी चाहिए।

राष्ट्रीय राजधानी में दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों की चिंताओं के संदर्भ में पीठ ने निर्देश दिया कि दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हों, जब तक कि संविधान के अंतर्गत सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई विशिष्ट उपाय आवश्यक न हो।

अदालत ने प्राधिकरणों को कानून-व्यवस्था की आवश्यकताओं और यातायात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडों की बिना देरी समीक्षा करने का भी निर्देश दिया। उसने जोर दिया कि वैध यातायात नियमों के अधीन लोगों को शहर में स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

इंटरनेट कनेक्टिविटी के संबंध में पीठ ने कहा कि कानून के अनुसार सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि यह आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत प्राधिकरणों को उपलब्ध शक्तियों को समाप्त नहीं करता।

सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लगाए गए प्रतिबंधों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। वकीलों द्वारा इस क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 लागू करने पर आपत्ति जताने के बाद पीठ ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि यदि संबंधित सूचना अभी तक हटाई नहीं गई है, तो उसे हटा दिया जाए। अदालत ने कहा कि नागरिकों और विधि व्यवसाय से जुड़े लोगों को न्याय तक बिना रुकावट पहुंच मिलनी चाहिए।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बहाल हो गई हैं और सभी मेट्रो स्टेशन संचालित हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार को शहर के 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित था, लेकिन वे प्रतिबंध अब लागू नहीं हैं।

मेहता ने अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को बिना रुकावट अपने कर्तव्य निभाने की अनुमति दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट दो मामलों की सुनवाई कर रहा था: अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका और वरिष्ठ अधिवक्ता तथा तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका।

के.के. वेणुगोपाल, कपिल सिब्बल, गोपाल संकरनारायणन, संजय हेगड़े, शोएब आलम, एन. हरिहरन, शादान फरासत और अरुंधति काटजू सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने 10 अक्टूबर के सीजेपी प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों और वकीलों के खिलाफ पुलिस के कथित अत्याचारों पर चिंता जताई।

पीठ ने केंद्र से याचिकाओं पर संक्षिप्त जवाब दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई मंगलवार के लिए तय की। उसने मामले में हस्तक्षेप याचिकाओं को दाखिल करने की भी अनुमति दी और निर्देश दिया कि उन पर 13 अक्टूबर को विचार किया जाए।

इन निर्देशों से सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए वैध प्रतिबंधों और नागरिकों के शांतिपूर्ण सभा, स्वतंत्र आवाजाही तथा आवश्यक सेवाओं तक पहुंच के अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

By Rajeev Sharma

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