नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े प्लेटफॉर्मों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जारी जांच के तहत 442.35 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं।
एजेंसी ने रविवार को बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 25 सितंबर को अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया गया। ताजा कार्रवाई में सावधि जमा, वाणिज्यिक संपत्तियां, एक विला और कई आवासीय संपत्तियां शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां गेम्सक्राफ्ट के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, निजी पारिवारिक ट्रस्टों और उनसे जुड़ी अन्य संस्थाओं के नाम पर हैं।
इस ताजा कुर्की के बाद मामले में एजेंसी द्वारा कुर्क या फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 2,843 करोड़ रुपये हो गया है।
जांच गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज से संबंधित है। ये कंपनियां रम्मीकल्चर, रम्मीप्राइम, प्लेशिप और रम्मीटाइम जैसे ब्रांडों के तहत मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ऑनलाइन वास्तविक धन वाले गेमिंग प्लेटफॉर्म संचालित करती थीं।
ईडी ने बताया कि इन प्लेटफॉर्मों पर देशभर में करीब तीन करोड़ उपयोगकर्ता थे। एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में खिलाड़ी तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से थे, जहां ऑनलाइन वास्तविक धन वाले गेमिंग पर प्रतिबंध या पाबंदियां लागू हैं।
एजेंसी ने कंपनियों पर आमतौर पर ‘बॉट’ कहे जाने वाले स्वचालित कार्यक्रमों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। ईडी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्मों ने उपयोगकर्ताओं के सामने खुद को पारदर्शी और निष्पक्ष बताया था तथा दावा किया था कि उनके खेलों में स्वचालित खिलाड़ी शामिल नहीं होते।
एजेंसी का आरोप है कि इसके बावजूद उपयोगकर्ताओं की जानकारी या सहमति के बिना उनके खिलाफ बॉट का इस्तेमाल किया गया। ईडी ने दावा किया कि इससे खिलाड़ियों को आर्थिक नुकसान हुआ और कंपनियों के लिए कथित अपराध से अर्जित आय में योगदान मिला।
ईडी ने आगे आरोप लगाया कि कंपनियों की कारोबारी गतिविधियों ने लत लगने वाले गेमिंग के अनुकूल माहौल बनाकर लोगों को बार-बार दांव लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। एजेंसी के अनुसार, ऐसी गतिविधियों से हासिल प्लेटफॉर्म कमीशन कथित अपराध से अर्जित आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
ताजा कुर्की ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्मों से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित व्यापक जांच का हिस्सा है।
ईडी द्वारा लगाए गए आरोप जारी जांच का हिस्सा हैं और केवल इनके आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित नहीं हुई है।
