टीओडी नीति के दायरे में करनाल, रैपिड रेल की उम्मीदों को मिला नया बल

करनाल(बलविंदर सिंह): लंबे समय से प्रतीक्षित दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना को नया नीतिगत बल मिला है। हरियाणा सरकार ने प्रस्तावित कॉरिडोर को अपनी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति के दायरे में शामिल कर लिया है।

हरियाणा नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने 22 सितंबर को वर्ष 2016 में लागू की गई टीओडी नीति में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी की। संशोधन के तहत दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत आरआरटीएस कॉरिडोर को टीओडी आधारित योजना के लिए पात्र मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (एमआरटीएस) मार्गों में शामिल किया गया है।

यह कदम हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एचएमआरटीसी) की सिफारिश पर राज्य सरकार द्वारा कॉरिडोर को मंजूरी दिए जाने के बाद उठाया गया है। विभाग ने कहा कि एचएमआरटीसी के अनुरोध के बाद इस मार्ग को मौजूदा टीओडी नीति की अनुसूची में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है।

करनाल के निवासियों के लिए इस निर्णय से उस रैपिड ट्रांजिट परियोजना को लेकर उम्मीदें फिर जगी हैं, जो कई वर्षों से कागजों तक सीमित है। प्रस्तावित संपर्क से रोजगार, शिक्षा, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए करनाल और दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले लोगों को मौजूदा सड़क और रेल सेवाओं का एक वैकल्पिक साधन मिलने की उम्मीद है।

करनाल जून 2015 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का हिस्सा बना था। इसके बाद क्षेत्र में बेहतर क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय राजधानी से मजबूत संपर्क की उम्मीदें बढ़ गई थीं।

रैपिड रेल परियोजना की प्रारंभिक परिकल्पना वर्ष 2014 में दिल्ली-पानीपत मार्ग के लिए की गई थी। जनवरी 2020 में तत्कालीन हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित मार्ग का विस्तार करनाल तक किया गया।

प्रस्तावित कॉरिडोर नरेला, कुंडली, सोनीपत, मुरथल, गन्नौर, समालखा, पानीपत, घरौंडा और करनाल सहित प्रमुख स्थानों से होकर गुजरेगा।

करनाल क्षेत्र में करनाल आईएसबीटी, सेक्टर-7, घरौंडा और कोहंड सहित कई स्टेशनों का प्रस्ताव है। करनाल बाईपास को भविष्य के स्टेशन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। पानीपत खंड में पानीपत सिटी, सेवाह और समालखा को शामिल करने का प्रस्ताव है, जबकि सेक्टर-18 को भविष्य के स्टेशन के रूप में चिन्हित किया गया है।

सोनीपत क्षेत्र में प्रस्तावित मार्ग में गन्नौर, मुरथल, बहालगढ़ चौक और कुंडली शामिल हैं। बरही और केएमपी को भविष्य के स्टेशनों में शामिल किया गया है।

टीओडी ढांचे में शामिल किए जाने से प्रस्तावित स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों की योजना बनाने के तरीके पर भी असर पड़ सकता है। टीओडी के तहत आमतौर पर सार्वजनिक परिवहन को भूमि उपयोग की योजना के साथ जोड़ने पर जोर दिया जाता है। इससे बेहतर संपर्क, मिश्रित उपयोग वाले विकास और परिवहन केंद्रों के आसपास अपेक्षाकृत सघन शहरी विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता अंशुल नरंग ने कहा कि नीतिगत निर्णय से प्रस्तावित नेटवर्क के आसपास विकास के लिए एक व्यवस्थित ढांचा उपलब्ध होगा।

उन्होंने कहा, “जब स्टेशनों के आसपास विकास की योजना परिवहन व्यवस्था के साथ बनाई जाएगी, तो इससे संपर्क बेहतर हो सकता है और करनाल-दिल्ली के बीच दैनिक यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सकती है। नियमित यात्रियों के लिए यात्रा समय में कमी से ईंधन और आवागमन की लागत में भी बचत हो सकती है।”

स्थानीय निवासी दीपक बरेजा ने कहा कि करनाल और आसपास के जिलों के लोग लंबे समय से दिल्ली के साथ सीधे रैपिड ट्रांजिट संपर्क का इंतजार कर रहे हैं।

इस नवीनतम अधिसूचना से निवासियों में नई उम्मीद जगी है। हालांकि, नीति में शामिल किया जाना अभी योजना से जुड़ा कदम है। प्रस्तावित कॉरिडोर वास्तविक निर्माण की दिशा में कब आगे बढ़ेगा, यह आगे की मंजूरियों और क्रियान्वयन संबंधी कदमों पर निर्भर करेगा।

By Balwinder Singh

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