नई दिल्ली(राजीव शर्मा):नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोवा रिग्पा (एनआईएसआर), लेह ने 23 सितंबर 2026 को साबू थांग, लेह स्थित अपनी नई एकेडमिक बिल्डिंग में 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया। यह कार्यक्रम एनआईएसआर के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट की अध्यक्षता में “बेहतर कल के लिए आयुर्वेद” थीम के तहत आयोजित किया गया था।
इस समारोह में लद्दाख और हिमालयी क्षेत्र (जिसमें लाहौल, धर्मशाला, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं) के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी, चिकित्सक, विद्वान और हितधारक शामिल हुए। इस कार्यक्रम ने बातचीत, ज्ञान के आदान-प्रदान और आज के समय में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की प्रासंगिकता पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान किया।
विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों के विभिन्न पहलुओं और स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और इन परंपराओं को संरक्षित करने, उनका दस्तावेजीकरण करने और उन्हें बढ़ावा देने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
लद्दाख और व्यापक हिमालयी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से लोगों की भागीदारी ने समारोह को एक क्षेत्रीय आयाम दिया और ज्ञान व अनुभवों के आदान-प्रदान को आसान बनाया।
यह कार्यक्रम पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने, एकेडमिक जुड़ाव को मजबूत करने और एक स्वस्थ भविष्य के लिए उनके योगदान के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने की एनआईएसआर की कोशिशों को दर्शाता है।
समारोह का समापन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के ज्ञान और पद्धतियों के माध्यम से एक स्वस्थ कल के निर्माण की दिशा में ज्ञान साझा करने, सहयोग और सामूहिक प्रयासों पर जोर देने के साथ हुआ।
