नई दिल्ली(राजीव शर्मा): दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह ढह चुके सत्य निकेतन हॉस्टल के पास स्थित इमारत को गिराने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने इस दावे के आधार पर भी सवाल उठाया कि मलबे के नीचे अब भी लोग फंसे हो सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष एक वकील ने मामले की तत्काल सूचीबद्धता की मांग की। वकील ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने ढहे हुए हॉस्टल के बेसमेंट से मलबा हटाए बिना ही साथ वाली इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी।
याचिकाकर्ता ने यह आशंका भी जताई कि कुछ लोग अब भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।
हालांकि, पीठ ने इस जानकारी के स्रोत पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि पड़ोसी इमारत को गिराने का फैसला लेने से पहले अधिकारियों ने संभवतः तकनीकी आकलन किया होगा।
अदालत ने वकील से कहा कि मलबे के नीचे लोगों के फंसे होने की आशंका जताने के बजाय वह अपने दावे के समर्थन में तथ्यात्मक या तकनीकी आधार प्रस्तुत करें।
न्यायाधीशों ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका पर नियमित सूची के अनुसार सुनवाई होगी। पीठ को तत्काल सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला।
सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट आवास के रूप में इस्तेमाल की जा रही सत्य निकेतन की इमारत 6 सितंबर को मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई थी।
इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद पेइंग गेस्ट आवासों में सुरक्षा मानकों और ऐसी संपत्तियों की निगरानी में नगर निकायों की भूमिका पर सवाल उठे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 सितंबर को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को हादसे की उच्चस्तरीय जांच करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि सरकार इस घटना की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
हादसे का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और सरकार द्वारा संचालित हॉस्टलों समेत अपर्याप्त आवासीय सुविधाओं तथा छात्रों की सुरक्षा और संरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
अदालत ने पेइंग गेस्ट सुविधाओं की निगरानी के लिए एमसीडी और अन्य प्राधिकरणों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नियामक तंत्र की कमियों को भी रेखांकित किया था।
साथ वाली इमारत को खतरनाक घोषित किया गया
इमारत गिरने के बाद नगर निकाय के अधिकारियों ने पड़ोसी इमारत को असुरक्षित घोषित कर दिया। इसके बाद 8 सितंबर को उसे नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई शुरू की गई।
यह इमारत लड़कियों के लिए पेइंग गेस्ट आवास के रूप में संचालित हो रही थी। पड़ोस की पांच मंजिला इमारत के ढहने के बाद इसे खाली करा लिया गया था।
ताजा सुनवाई सत्य निकेतन हादसे से निपटने के अधिकारियों के तरीके की लगातार हो रही जांच और इलाके की इमारतों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच हुई है।
