नई दिल्ली (राजीव शर्मा): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व सहयोगी चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद पार्टी के दो संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
रावत ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि ईडी की कार्रवाई से उपजा यह विवाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस के अभियान को किसी भी तरह कमजोर करे।
देहरादून में जीना के परिसरों पर ईडी की यह कार्रवाई कथित तौर पर उत्तराखंड ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में ओएमआर (OMR) उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर से जुड़े आरोपों से संबंधित बताई जा रही है। तलाशी के दौरान नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरें भी सामने आई हैं।
अपने बयान में रावत ने पुष्टि की कि जीना ने पूर्व में उनके साथ बेहद करीबी से काम किया था, जिसमें उनके विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में दी गई सेवाएं भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जब रावत सरकार और संगठन में विभिन्न पदों पर थे, तब जीना ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।
रावत ने स्पष्ट किया कि उनके पूर्व सहयोगी पर लगे इन आरोपों को स्वीकार करना उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि यदि अंततः ऐसे सबूत सामने आते हैं जो यह साबित करते हैं कि जीना परीक्षा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ में शामिल थे, तो ऐसा आचरण बेहद शर्मनाक होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल उनके पास इन आरोपों को साबित तथ्य के रूप में स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई के समय (टाइमिंग) पर सवाल उठाते हुए इसके राजनीतिक निहितार्थ होने का भी संकेत दिया, क्योंकि उत्तराखंड चुनावी दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने अपनी पिछली एक टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चुनाव की तैयारियां तब साफ नजर आने लगती हैं जब जांच एजेंसियां दस्तक देने लगें; उन्होंने कहा कि इस बार यह कार्रवाई उनके किसी करीबी के ठिकानों पर हुई है।
रावत ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने में जुटे हैं और उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का भी जिक्र किया, जो शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनसे जुड़ा कोई भी विवाद उन ताकतों को कोई मौका दे जो पार्टी के इस अभियान को कमजोर करना चाहती हैं।
चूंकि रावत के पास वर्तमान में कोई सरकारी पद नहीं है, इसलिए उन्होंने अपनी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने का फैसला किया। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से भी खुद को अलग कर लिया।
रावत ने कहा कि इस कदम का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनके पूर्व सहयोगी से जुड़े घटनाक्रम से कांग्रेस पार्टी के हितों या उसके राजनीतिक अभियान को कोई नुकसान न पहुंचे।
