चंडीगढ़ (राजीव शर्मा): कनाडा में कार्यरत हजारों भारतीयों को अब अपने कौशल को निखारने के लिए अधिक सहूलियत मिल सकेगी। दरअसल, कनाडाई सरकार ने एक अस्थायी प्रावधान लागू किया है, जिसके तहत पात्र वर्क परमिट धारक अलग से स्टडी परमिट लिए बिना अल्पावधि (शॉर्ट-टर्म) शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) द्वारा 9 सितंबर, 2026 को घोषित इस नीति का मुख्य उद्देश्य उन अस्थायी श्रमिकों को अवसर देना है जो पहले से कनाडा में मौजूद हैं और नौकरी जारी रखते हुए अतिरिक्त योग्यता, पेशेवर प्रशिक्षण या लाइसेंस हासिल करना चाहते हैं।
यह कदम भारतीयों—विशेषकर पंजाबियों—के लिए काफी अहम साबित हो सकता है, जिनकी कनाडा के अस्थायी विदेशी कार्यबल में एक बड़ी हिस्सेदारी है।
नौकरी छोड़े बिना पढ़ाई कर सकेंगे कामगार
इस नई व्यवस्था के तहत, वैध वर्क परमिट रखने वाले पात्र विदेशी कामगार अलग से स्टडी परमिट के लिए आवेदन किए बिना छह महीने या उससे कम अवधि के स्वीकृत पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं।
यह छूट पाठ्यक्रम की अवधि तक या फिर कामगार के मौजूदा वर्क परमिट की वैधता समाप्त होने तक (दोनों में से जो भी पहले हो) प्रभावी रहेगी।
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कर्मचारी अपनी शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग पूरी करने के साथ-साथ नौकरी भी जारी रख सकते हैं। इसका मतलब यह है कि उन्हें अपनी आमदनी का जरिया गंवाए बिना या स्टडी परमिट की अतिरिक्त आवेदन प्रक्रिया से गुजरे बिना नया हुनर सीखने का मौका मिलेगा।
यह प्रावधान खासतौर पर उन कामगारों के लिए बेहद मुफीद है जो अपने मौजूदा या संभावित पेशे से जुड़े अल्पकालिक लाइसेंस, प्रमाणन या कौशल-आधारित प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं।
ट्रेड्स और हेल्थकेयर क्षेत्र के कामगारों को सबसे ज्यादा फायदा
IRCC ने विशेष तौर पर कुशल कारीगरों (ट्रेड्सपर्सन्स), नर्सों और लैब तकनीशियनों जैसे पेशों का उदाहरण दिया है, जिन्हें इस बदलाव से सीधा लाभ मिल सकता है।
कनाडाई सरकार चाहती है कि स्वास्थ्य सेवा, निर्माण और अन्य आवश्यक सेवाओं जैसे श्रम की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भरपाई की जा सके। नौकरी में बने रहते हुए लक्षित प्रशिक्षण लेने की अनुमति मिलने से नियोक्ताओं को भी अधिक योग्य कार्यबल हासिल करने में मदद मिलेगी।
इससे पहले, स्टडी परमिट की अनिवार्यता वाले पाठ्यक्रमों के लिए कागजी कार्रवाई और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। नया कदम पात्र पाठ्यक्रमों के लिए इस प्रशासनिक अड़चन को पूरी तरह समाप्त करता है।
स्थायी निवास (पीआर) का सीधा रास्ता नहीं
यद्यपि यह नीति कई अस्थायी कामगारों के पेशेवर प्रोफाइल को मजबूत बना सकती है, लेकिन यह स्थायी निवास (पीआर) की गारंटी नहीं देती।
इस छूट के तहत शॉर्ट-टर्म कोर्स पूरा करने से एक्सप्रेस एंट्री में स्वतः अतिरिक्त अंक नहीं मिलेंगे और न ही किसी आर्थिक आव्रजन कार्यक्रम के तहत चयन सुनिश्चित होगा। आवेदकों को पीआर हासिल करने के लिए संबंधित श्रेणी की अनिवार्य पात्रता शर्तों को पूरा करना ही होगा।
कनाडा सरकार की 2026-2028 आव्रजन योजना में देश में मौजूद अस्थायी निवासियों को पीआर में तब्दील करने का एक बड़ा लक्ष्य शामिल है, जिसके तहत 2026 और 2027 के दौरान 33,000 तक अस्थायी कामगारों को स्थायी निवास देने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, इस अध्ययन छूट को सीधे तौर पर पीआर योजना नहीं माना जाना चाहिए।
कोर्स पूरा करने पर नहीं मिलेगा पीजीडब्ल्यूपी
इस नीति की एक और महत्वपूर्ण सीमा यह है कि इस अस्थायी व्यवस्था के तहत पढ़ाई करने से पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) की पात्रता नहीं बनती।
सरल शब्दों में कहें तो, कोई भी कामगार इस छूट के तहत कोई शॉर्ट कोर्स पूरा करके उसके आधार पर पीजीडब्ल्यूपी का दावा नहीं कर सकता। यह सुविधा मुख्य रूप से अस्थायी कामगार के रूप में काम करते हुए ही संक्षिप्त शिक्षा, प्रशिक्षण और लाइसेंसिंग के लिए लाई गई है।
दिसंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी यह नीति
IRCC के अनुसार, पात्र वर्क परमिट धारकों को इस सप्ताह से इस संबंध में सूचनाएं भेजी जाने लगेंगी। यह अस्थायी नीति 31 दिसंबर, 2027 तक लागू रहने वाली है।
यह प्रावधान विशेष रूप से उन्हीं लोगों के लिए है जो पहले से वैध वर्क परमिट के साथ कनाडा में रह रहे हैं। यह कनाडा से बाहर रहने वाले उन लोगों के लिए आव्रजन का कोई नया रास्ता तैयार नहीं करता जो काम या पढ़ाई के लिए देश में दाखिल होना चाहते हैं।
कनाडा में पहले से कार्यरत भारतीय और पंजाबी कामगारों के लिए यह बदलाव अपनी नौकरी को रोके बिना अपनी योग्यता बढ़ाने, पेशेवर लाइसेंस हासिल करने और नए हुनर सीखने का एक बड़ा अवसर लेकर आया है।
यह कदम देश में मौजूद कार्यबल का बेहतर उपयोग करने और कुशल श्रमिकों की मांग वाले क्षेत्रों में कमी को पाटने के कनाडा के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
