चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): मानसून की चाल सुस्त पड़ने से पंजाब और चंडीगढ़ में गर्मी और उमस का प्रकोप बढ़ गया है, हालांकि शुक्रवार को राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और गुरदासपुर में बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जबकि चंडीगढ़ में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने के आसार हैं।
सप्ताहांत में मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट ले सकता है; 14 और 15 सितंबर को पंजाब और चंडीगढ़ में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
उमस के साथ चढ़ा पारा
गुरुवार को राज्य का औसत अधिकतम तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस चढ़ गया, जो सामान्य से करीब 2.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बढ़ते तापमान और हवा में मौजूद नमी के गठजोड़ ने कई इलाकों में लोगों को बेचैन कर दिया है।
दिन के दौरान केवल दो स्थानों पर ही बारिश दर्ज की गई। लुधियाना में 11.4 मिमी, जबकि रूपनगर में मात्र 0.5 मिमी वर्षा हुई।
चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पंजाब में 37.5 डिग्री सेल्सियस के साथ पटियाला सबसे गर्म स्थान रहा, जिसके बाद रूपनगर में पारा 37.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
तीन मौसमी प्रणालियों का असर
क्षेत्र में मौसम का मौजूदा रुख तीन अलग-अलग प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से तय हो रहा है।
मानसून ट्रफ इस समय जम्मू से देहरादून, उत्तर प्रदेश और झारखंड होते हुए बंगाल की खाड़ी के कम दबाव वाले क्षेत्र तक फैली हुई है। इसके अलावा, उत्तरी हरियाणा और आसपास के इलाकों में ऊपरी वायुमंडल में एक चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) भी बना हुआ है।
साथ ही, उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इन प्रणालियों के असर से बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है और पंजाब व चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
पंजाब ने बाहर से ली 7,000 मेगावाट से अधिक बिजली
गर्मी और उमस के इस दौर में राज्य में बिजली की मांग भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
सुबह 6:30 बजे पंजाब में बिजली की कुल जरूरत 11,116 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि राज्य का अपना उत्पादन महज 4,002 मेगावाट था। 7,114 मेगावाट के इस भारी अंतर को पाटने के लिए राज्य के बाहर से बिजली मंगवाई जा रही थी।
उस समय ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.43 हर्ट्ज रिकॉर्ड की गई।
भाखड़ा और पोंग बांध का जलस्तर पूरी क्षमता से नीचे
राज्य के प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण अभी भी उनके अधिकतम क्षमता स्तर (एफआरएल) से नीचे बना हुआ है।
भाखड़ा बांध में जलस्तर 1,643.91 फीट दर्ज किया गया, जहां 28,765 क्यूसेक पानी की आवक के मुकाबले 25,913 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।
पोंग बांध का जलस्तर 1,372.42 फीट रहा। यहां पानी की आवक 11,640 क्यूसेक रही, जबकि निकासी 13,009 क्यूसेक दर्ज की गई।
मौसम विभाग द्वारा 14 और 15 सितंबर को तेज बारिश के आसार जताए जाने के मद्देनजर, आने वाले दिन मौजूदा गर्मी से राहत दिला सकते हैं और साथ ही राज्य के बांधों में पानी की आवक को भी प्रभावित कर सकते हैं।
