चंडीगढ़(बलविंदर सिंह):हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए निर्णयों एवं दिए गए निर्देशों का समयबद्ध और परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत हर निर्णय को स्पष्ट एक्शन प्वाइंट में परिवर्तित कर उसके लिए जिम्मेदार विभाग/अधिकारी, समय-सीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित किए जाएंगे तथा अनुपालन की नियमित निगरानी की जाएगी।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी एसओपी के अनुसार, मुख्यमंत्री की बैठकों की मिनट्स ऑफ मीटिंग (एमओएम) केवल चर्चा का विवरण न होकर निर्णय एवं कार्यवाही केंद्रित दस्तावेज होंगी। हर निर्णय को स्पष्ट, संक्षिप्त और मापनीय रूप में दर्ज किया जाएगा। जहां एक से अधिक विभागों की भूमिका होगी, वहां लीड डिपार्टमेंट/एजेंसी तथा संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएंगी।
बैठक की कार्यवाही का प्रारूप तीन कार्य दिवसों के भीतर तैयार किया जाएगा। अनुमोदित एमओएम जारी होने के बाद उसमें दर्ज सभी एक्शन प्वाइंट को दो कार्य दिवसों के भीतर सीएम मीटिंग मॉनिटरिंग पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। पोर्टल पर संबंधित विभाग, जिम्मेदार अधिकारी, समय-सीमा, लक्ष्य/माइलस्टोन, वर्तमान स्थिति, एटीआर तथा आवश्यक सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट/एविडेंस उपलब्ध करवाए जाएंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक एक्शन प्वाइंट की स्थिति को केवल सामान्य शब्दों में बताने के बजाय वस्तुनिष्ठ रूप से दर्ज किया जाएगा। इसके लिए कम्प्लीटेड (पूर्ण), इन प्रोग्रेस (प्रक्रियाधीन), ओवरड्यू (समय-सीमा से लंबित), नॉट स्टार्टेड (अभी प्रारंभ नहीं) तथा नॉट फिजिबल/इश्यू रिक्वायरिंग डिसीजन (व्यवहार्य नहीं/निर्णय अपेक्षित) जैसी श्रेणियों में स्थिति अपडेट की जाएगी। किसी कार्य को पूर्ण दर्शाने से पहले, जहां संभव हो, संबंधित आदेश, स्वीकृति, प्रगति रिपोर्ट, पोर्टल रिपोर्ट, फोटो, सांख्यिकीय आंकड़े अथवा अन्य प्रमाण भी उपलब्ध करवाने होंगे।
अनुपालन की प्राथमिक एटीआर एमओएम के प्रसारण के बाद एक माह के भीतर प्रस्तुत की जाएगी। जिन कार्यों को निर्धारित अवधि में पूरा नहीं किया जा सकेगा, उनके संबंध में प्रत्येक माह अपडेटेड एटीआर प्रस्तुत करनी होगी। ऐसी एटीआर में अब तक की कार्रवाई, शेष कार्य, विलंब का कारण, वर्तमान स्थिति, संशोधित समय-सीमा तथा अपेक्षित सहयोग या निर्णय का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा न होने पर संबंधित प्रशासकीय सचिव/विभागाध्यक्ष द्वारा विलंब के कारणों की समीक्षा की जाएगी। लगातार लंबित रहने वाले अथवा नीतिगत, वित्तीय या प्रशासनिक निर्णय की आवश्यकता वाले मामलों को सक्षम स्तर पर निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समयबद्ध मामलों की संबंधित प्रशासकीय सचिव द्वारा व्यक्तिगत निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।
प्रत्येक विभाग एक वरिष्ठ एवं जिम्मेदार अधिकारी को विभागीय नोडल अधिकारी नामित करेगा। नोडल अधिकारी मुख्यमंत्री की बैठकों से संबंधित सभी एक्शन प्वाइंट का समन्वय, समय पर एटीआर प्राप्त करना, उसकी तथ्यात्मक शुद्धता सुनिश्चित करना, पोर्टल अपडेट करवाना तथा लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करेगा। विभागों को नामित नोडल अधिकारी का विवरण 15 सितंबर, 2026 तक उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें पोर्टल के लिए आवश्यक लॉगिन आईडी एवं एक्सेस प्रदान किया जा सके।
एसओपी के तहत प्रत्येक विभाग को अपने स्तर पर लंबित एक्शन प्वाइंट की नियमित आंतरिक समीक्षा भी करनी होगी। आगामी समीक्षा बैठकों से पहले पूर्ववर्ती बैठकों के लंबित बिंदुओं की विभागवार और एक्शन प्वाइंट के आधार पर स्थिति तैयार की जाएगी, जिसमें उपलब्धि, बाधा और आगे की कार्य योजना स्पष्ट रूप से दर्शाई जाएगी। समीक्षा में केवल कागजी प्रगति के बजाय वास्तविक परिणाम को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री की बैठकों की कार्यवाही में केवल वही निर्णय एवं निर्देश दर्ज किए जाएंगे जो वास्तव में बैठक में लिए गए हों। चर्चा और अंतिम निर्णय के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाएगा तथा लंबित निर्णयों को स्पष्ट रूप से डिसीजन पेंडिंग/फॉर फर्दर एग्जामिनेशन के रूप में दर्शाया जाएगा। साथ ही, बैठकों से संबंधित एजेंडा, बैकग्राउंड नोट, एमओएम, एटीआर और अन्य अभिलेखों का सुरक्षित एवं उचित रिकॉर्ड रखा जाएगा।
यह एसओपी तुरंत प्रभाव से लागू होगी और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित सभी आगामी बैठकों के साथ-साथ, जहां तक संभव हो, पूर्व में आयोजित बैठकों के लंबित एक्शन प्वाइंट की निगरानी पर भी लागू होगी।
सरकार ने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं और समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अनावश्यक विलंब अथवा निर्देशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा।
