काठमांडू (राजीव शर्मा): नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने तबाही के गहरे निशान छोड़े हैं, जहां मृतकों की संख्या बढ़कर 1,356 हो गई है, जबकि राहत व बचाव एजेंसियां अब भी लापता हजारों लोगों की तलाश में जुटी हैं।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, 4,994 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बचाव दल अब तक 13,396 लोगों को सुरक्षित निकालने में सफल रहे हैं।
यह आपदा 26 अगस्त को शुरू हुई थी, जब नेपाल-तिब्बत सीमा के करीब बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन (एवलांच) के कारण भारी मात्रा में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा। भोटेकोशी नदी इस बाढ़ के पानी को दक्षिण की ओर बहा ले गई, जिससे कई बस्तियां पूरी तरह तबाह हो गईं। मकान, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए, जबकि कई जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स) को भी भारी नुकसान पहुंचा।
कई जिलों से सैकड़ों शव बरामद
आपदा की भयावहता उस समय और साफ हो गई जब बचाव दलों को नदी के निचले बहाव वाले क्षेत्रों से लगातार शव मिलने लगे।
NDRRMA के आंकड़ों के मुताबिक, चितवन से सबसे अधिक 363 शव बरामद किए गए हैं, इसके बाद नवलपरासी पूर्व से 223 और नवलपरासी पश्चिम से 221 शव मिले हैं। नुवाकोट में 197 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि रसुवा में 169 शव निकाले गए हैं। गोरखा, धादिंग और तनहुं में क्रमशः 75, 70 और 38 मौतें दर्ज की गई हैं।
हालांकि, अधिकारियों के सामने अब एक और बड़ी चुनौती पीड़ितों की शिनाख्त करने की है।
सोमवार तक बरामद शवों में से केवल 98 की ही औपचारिक पहचान हो सकी थी और उन्हें परिजनों को सौंपा गया। तेज बहाव वाले पानी और कीचड़ में काफी समय तक रहने के कारण कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके हैं। कई मामलों में तो शवों के सिर्फ अंग ही बरामद हुए हैं, जिससे पहचान करना और भी मुश्किल हो गया है।
पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा
नेपाल पुलिस ने लापता दर्ज लोगों के परिजनों से डीएनए के नमूने एकत्र करने शुरू कर दिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इन नमूनों की मदद से उन शवों की पहचान की जा सकेगी जिन्हें पारंपरिक तरीकों से पहचाना नहीं जा सकता।
अधिकारियों ने बताया कि 1,000 से अधिक अज्ञात शवों के डीएनए नमूने सुरक्षित रखने के बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है, ताकि पहचान की प्रक्रिया बाद में भी जारी रखी जा सके।
प्रभावित इलाकों के अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र भारी दबाव में काम कर रहे हैं। लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की तस्वीरें लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं और वहां प्रदर्शित तस्वीरों की जांच कर रहे हैं ताकि अपनों के बारे में कोई सुराग मिल सके।
नेपाल से आगे तक तबाही का असर
इस आपदा ने सीमा पार चीनी क्षेत्र में भी भारी जान-माल का नुकसान पहुंचाया है। चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में मौतों का आंकड़ा कम से कम 43 तक पहुंच गया है, जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस आपदा के सीमा-पार प्रभाव ने हिमालयी क्षेत्र में बचाव और राहत कार्यों को और अधिक जटिल बना दिया है।
राष्ट्रपति ने किया बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा
नेपाल के राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सोमवार को जारी बचाव और राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए बुरी तरह प्रभावित नुवाकोट और रसुवा जिलों का दौरा किया।
अधिकारियों ने राष्ट्रपति को लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन सहायता के वितरण और अस्थायी आवास की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। इस दौरान पुनर्वास और बस्तियों के पुनर्निर्माण की योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
दौरे के बाद पौडेल ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे नेपाल और अन्य संवेदनशील हिमालयी देशों के सामने आ रही जलवायु संबंधी चुनौतियों पर कड़े कदम उठाएं।
उन्होंने देश के भीतर राजनीतिक एकजुटता का आह्वान करते हुए राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की कि वे इस आपदा को आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बनाने के बजाय पीड़ितों की मदद पर ध्यान केंद्रित करें।
नेपाल में राष्ट्रीय शोक
आपदा के 13वें दिन के मौके पर देश में सोमवार को राष्ट्रीय शोक मनाया गया। नेपाल भर में सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया गया, और विदेशों में स्थित नेपाली राजनयिक दूतावासों ने भी इस प्रोटोकॉल का पालन किया।
जैसे-जैसे खोज दल तबाह हुए गांवों, नदी के किनारों और मलबे से पटे इलाकों में खोजबीन जारी रखे हुए हैं, पूरे देश में प्रभावित परिवार अपने लापता रिश्तेदारों के बारे में किसी भी खबर के इंतजार में बेचैन हैं।
हजारों लोगों के अभी भी लापता होने और पहचान की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चलने के कारण, नेपाल में बहाली और पुनर्वास का यह अभियान लंबा और कठिन साबित होने वाला है।
