काठमांडू (राजीव शर्मा): नेपाल के कई हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,290 हो गई है। यह जानकारी नेपाल पुलिस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से सामने आई है, जहां राहत और बचाव दल आपदा प्रभावित इलाकों में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं।
तेजी से बढ़ता यह आंकड़ा 26 अगस्त को देश में आई इस भीषण आपदा के विकराल रूप को दर्शाता है। भोटेकोशी नदी और आसपास के क्षेत्रों में केंद्रित इस बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
यह ताजा आंकड़ा 3 सितंबर को दर्ज की गई 1,252 मौतों की तुलना में एक तेज बढ़ोतरी को दर्शाता है, जिससे साफ है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं।
हजारों लोग अब भी लापता
राहत दलों द्वारा कई शव बरामद किए जाने के बावजूद अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ताजा स्थिति की रिपोर्टों के अनुसार, 4,700 से अधिक लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि तलाशी अभियान आगे बढ़ने के साथ मौतों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
बचाव कर्मी बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, विशेष रूप से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास। जिन लोगों का कुछ पता नहीं चल पाया है, उनमें कई श्रमिक भी शामिल हैं।
अधिकारियों के सामने बरामद शवों की पहचान करने की भी एक बड़ी चुनौती खड़ी है। पहले की रिपोर्टों से पता चला था कि बरामद शवों में से केवल एक छोटे हिस्से की ही औपचारिक पहचान हो पाई थी और उन्हें परिजनों को सौंपा जा सका था।
आपदा से बड़े पैमाने पर तबाही
इस बाढ़ से कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है, जिनमें चितवन, नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट और रसुवा जैसे जिले शामिल हैं, जहां से बड़े पैमाने पर हताहत होने की खबरें आई हैं।
इस आपदा ने परिवहन व्यवस्था को भी ठप कर दिया और प्रमुख बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर दिया, जिससे आपातकालीन टीमों के लिए कुछ प्रभावित बस्तियों तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों से जुड़ी एक भीषण भूगर्भीय घटना के कारण यह जलप्रलय आया, जिसने निचले इलाकों में पानी, कीचड़ और मलबे का एक विनाशकारी सैलाब ला दिया।
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी
सुरक्षा बल और आपातकालीन दल जीवित बचे लोगों तथा लापता व्यक्तियों की तलाश में जुटे हुए हैं, साथ ही वे शवों को निकालने और प्रभावित समुदायों को सहायता प्रदान करने का काम भी कर रहे हैं।
जलविद्युत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां सैकड़ों श्रमिकों के लापता होने की सूचना है। बचाव दल कीचड़ और मलबे से बंद पड़े रास्तों को खोलने और प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनों तथा अन्य संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं।
बरामद शवों की बढ़ती संख्या के बीच, अधिकारियों के लिए अब न केवल लापता लोगों का पता लगाना, बल्कि मृतकों की शिनाख्त करना और शोकाकुल परिवारों को उनके परिजनों की स्थिति से अवगत कराना भी एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
1,290 मौतों के इस ताजा आंकड़े के साथ यह आपदा नेपाल द्वारा हाल के वर्षों में झेली गई सबसे भीषण प्राकृतिक त्रासदियों में से एक बन गई है, जबकि राहत और तलाश अभियान अभी भी जारी हैं।
