चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): पंजाब सरकार ने कहा है कि यदि कर्मचारी चाहते हैं तो वह केंद्र सरकार के मुकाबले वेतन समानता प्लस महंगाई भत्ता (डीए) सुनिश्चित करने को तैयार है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्य केवल केंद्र के डीए प्रतिशत को हूबहू दोहराने के बजाय कुल मुआवजा पैकेज को मिलान के लिए तैयार है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, उद्योग और वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर शामिल पंजाब के मंत्रियों के समूह ने कहा कि कई प्रमुख श्रेणियों में पंजाब सरकार के कर्मचारियों का हाथ में आने वाला वेतन (टेक-होम सैलरी) केंद्र सरकार के कर्मचारियों से पहले से ही अधिक है, भले ही केंद्र का डीए दर अधिक हो।
मंत्रियों ने कहा कि पंजाब के मौजूदा वेतन ढांचे को राज्य के भारी वेतन और पेंशन बोझ के साथ देखा जाना चाहिए। राज्य अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जबकि पूरे भारत का औसत 38% है। उन्होंने यह भी बताया कि भगवंत मान सरकार ने डीए में 14 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है और पहले ही विरासत में मिली 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया देयता में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया है।
भगवंत मान सरकार ने पंजाब कर्मचारियों के वेतन और डीए पर पेश किए छह प्रमुख तथ्य
- पंजाब के कर्मचारी देश के सबसे अधिक वेतन पाने वालों में शामिल
पंजाब सरकार के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वालों में हैं। राज्य के उच्च बेसिक-पे ढांचे के कारण कई प्रमुख श्रेणियों में उनका टेक-होम वेतन केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में अधिक है। - राजस्व का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च
पंजाब अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। पूरे भारत का औसत 38% है। - तीन चरणों में डीए में 14% अंक की बढ़ोतरी
भगवंत मान सरकार ने नवंबर 2021 में 28% से डीए बढ़ाकर नवंबर 2024 में 42% कर दिया है। यह बढ़ोतरी तीन चरणों में हुई: अक्टूबर 2022 में 34%, दिसंबर 2023 में 38% और नवंबर 2024 में 42%। - 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देयता विरासत में मिली
लगभग 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देयता 2016-21 की अवधि से संबंधित है और यह पिछली कांग्रेस तथा शिअद-भाजपा सरकारों से विरासत में मिली है। - 4,500 करोड़ रुपये से अधिक बकाया राशि पहले ही चुकाई गई
भगवंत मान सरकार विरासत में मिली डीए बकाया राशि चुकाने के लिए प्रतिबद्ध है और कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को मासिक किस्तों के जरिए 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही दी जा चुकी है। - 60% डीए से राज्य पर 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ
पंजाब का डीए 60% तक बढ़ाने से राज्य के खजाने पर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ेगा। इसे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च के साथ तौलना होगा।
वित्त मंत्री चीमा: पंजाब कर्मचारियों का कुल वेतन कई राज्यों से अधिक
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वेतन और पेंशन पर पंजाब का खर्च प्रमुख राज्यों में सबसे ऊंचे स्तर पर है। उन्होंने कहा, “जहां राज्यों द्वारा वेतन और पेंशन पर खर्च का राष्ट्रीय औसत लगभग 38% है, वहीं पंजाब अपने राजस्व का 51% सीधे वेतन और पेंशन पर खर्च करता है। यह दर्शाता है कि राज्य अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रति कितना वित्तीय दायित्व निभा रहा है।”
सरकार द्वारा पेश तुलनात्मक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमानों में पंजाब का वेतन और पेंशन खर्च 57,177.9 करोड़ रुपये है, जबकि राजस्व प्राप्तियां 1,11,740 करोड़ रुपये हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि बेसिक पे और डीए को मिलाकर देखने से स्पष्ट होता है कि कई प्रमुख श्रेणियों में पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों से अधिक टेक-होम वेतन मिल रहा है। उन्होंने कहा, “कुल टेक-होम वेतन की तुलना करने पर पंजाब हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों से आगे है।”
डीए बकाया: 14,000 करोड़ की देयता, 4,500 करोड़ से अधिक चुकाया गया
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछली अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से 2016 से 2021 की अवधि से संबंधित 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी डीए बकाया देयता विरासत में मिली है। उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार ही एकमात्र सरकार है जिसने विरासत में मिली बकाया राशि चुकाने का संकल्प लिया है। भगवंत मान सरकार ने इस देयता से इनकार नहीं किया। इसके बजाय, इसने चुकौती योजना बनाई और मासिक किस्तों के जरिए कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को बकाया राशि में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पहले ही कर दिया है।”
60% डीए की मांग पर मंत्री अमन अरोड़ा: वित्तीय यथार्थ को समझें
सूचना और जनसंपर्क मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि डीए को यांत्रिक रूप से 60% तक बढ़ाने की मांग को पंजाब की समग्र वित्तीय स्थिति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “डीए को 60% तक बढ़ाने से राज्य के खजाने पर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ेगा। इस वित्तीय यथार्थ को स्कूलों, अस्पतालों, बुनियादी ढांचे और पंजाब की तीन करोड़ आबादी के लिए अन्य आवश्यक सेवाओं को फंड देने की राज्य की जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना होगा।”
अरोड़ा ने कहा कि सरकार ने रोजगार और कर्मचारी कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ठोस कदमों से दिखाई है। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने केवल मेरिट के आधार पर 70,900 नौकरियां दी हैं। हमने शोषणकारी आउटसोर्सड भर्ती मॉडल को पूरी तरह खत्म कर दिया है और 65,000 कर्मियों को अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया शुरू की है। ये कदम दर्शाते हैं कि हमारी सरकार कर्मचारियों और मजदूरों के साथ दृढ़ता से खड़ी है।”
उन्होंने कर्मचारी संघों से टकराव के बजाय संवाद के जरिए सरकार के साथ जुड़ने की अपील की। अरोड़ा ने कहा, “कर्मचारी सुशासन की रीढ़ होते हैं। हम संघों से अपील करते हैं कि वे विपक्षी पार्टियों के राजनीतिक स्वार्थ को पहचानें, जिन्होंने चुनाव से पहले ऐसे वादे किए जिनके लिए वित्तीय प्रावधान नहीं किए गए। हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ सभी बकाया मुद्दों को बातचीत से सुलझाने के लिए तैयार हैं, ताकि पंजाब की जनता पर असहनीय बोझ डाले बिना कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जा सके।”
मंत्री डॉ. बलजीत कौर: पंजाब को केंद्र के डीए दर से मिलान का कोई कानूनी प्रावधान नहीं
सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कानूनी और वैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य का रुख पंजाब सिविल सर्विसेज (रिविज्ड पे) नियम, 2021 पर आधारित है। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के कर्मचारियों के वेतन और डीए पंजाब सिविल सर्विसेज (रिविज्ड पे) नियम, 2021 द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए थे। ये नियम किसी निश्चित डीए प्रतिशत या पंजाब को केंद्र सरकार के डीए दर से मिलान के लिए किसी स्वचालित सूत्र का प्रावधान नहीं करते हैं।”
डॉ. कौर ने कहा कि पंजाब के पास अपने कर्मचारियों की सेवा शर्तें तय करने का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, “पंजाब को अपनी वित्तीय परिस्थितियों के अनुसार अपने कर्मचारियों के मुआवजे का निर्धारण करने का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार प्राप्त है। हर राज्य को केंद्र सरकार के डीए दर को हूबहू दोहराने के लिए बाध्य करने वाला कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। राज्य को कर्मचारी कल्याण और सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाना होगा।”
मंत्रियों का संदेश: मुद्दे को समग्रता से देखा जाए
मंत्रियों के समूह ने कहा कि इस मुद्दे को केवल डीए प्रतिशत के एकल मापदंड के बजाय समग्र रूप में देखा जाना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई प्रस्तुति ने स्थापित किया कि पंजाब अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जबकि प्रमुख राज्यों के बीच पूरे भारत का औसत 38% है। इसमें यह भी दिखाया गया कि पंजाब के कई प्रमुख श्रेणियों के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में पहले से ही अधिक टेक-होम वेतन मिल रहा है, भले ही पंजाब का वर्तमान डीए दर 42% है जबकि केंद्र का दर 60% है।
मंत्रियों ने आगे कहा कि सरकार ने 2021 के बाद से डीए में 14% अंक की बढ़ोतरी की है और विरासत में मिली डीए बकाया राशि चुकाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य कर्मचारियों का उनका उचित हक देना नहीं है। हमारा दृष्टिकण यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी कल्याण, वित्तीय स्थिरता और पंजाब की जनता के हित एक साथ सुरक्षित रहें।”
