वैंकूवर (राजीव शर्मा): वैंकूवर पुलिस विभाग (VPD) के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख एंटी-गैंग पैरोकार और ‘किड्सप्ले यूथ फाउंडेशन’ के संस्थापक काल दोसांझ को एक लंबी गुप्त पुलिस जांच के बाद गिरफ्तार कर कई आपराधिक मामलों में नामजद किया गया है।
वैंकूवर पुलिस और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, दोसांझ पर $5,000 से अधिक की धोखाधड़ी के चार मामले, $5,000 से अधिक की चोरी के चार मामले और एक लोक सेवक द्वारा विश्वासघात का एक मामला दर्ज किया गया है। उनके सह-आरोपी सरबजीत सिंह गिल पर $5,000 से अधिक की धोखाधड़ी के तीन मामले और $5,000 से अधिक की चोरी के तीन मामले दर्ज हैं। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, ये कथित अपराध दिसंबर 2017 से जुलाई 2025 के बीच के बताए जा रहे हैं।
यह घटनाक्रम दो दशक से अधिक समय से वीपीडी से जुड़े और एंटी-गैंग अभियानों तथा युवाओं से जुड़े सामाजिक कार्यों के जरिए व्यापक पहचान बनाने वाले अधिकारी से संबंधित होने के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। दोसांझ ने 2015 में सरे स्थित किड्सप्ले यूथ फाउंडेशन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को गैंग, नशीले पदार्थों और अपराध से दूर रखना है।
वैंकूवर पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई लगभग ढाई साल चली एक गुप्त जांच के बाद की गई है। पुलिस ने गुरुवार को किड्सप्ले फाउंडेशन के कार्यालयों में तलाशी वारंट भी तामील किया। इसके अलावा, अधिकारियों को अदालती दस्तावेजों में दोसांझ से जुड़े पाए गए एक आवास पर भी देखा गया, जहां से बक्से और अन्य सामग्री जब्त की गई। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े ठोस तथ्यों की पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है। पुलिस ने जांच के दौरान जुटाए गए सभी सबूतों को सार्वजनिक नहीं किया है, और आपराधिक आरोपों में शामिल विवरणों को दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
वैंकूवर पुलिस विभाग शुक्रवार सुबह एक संवाददाता सम्मेलन में विस्तृत जानकारी साझा करेगा। उम्मीद है कि वीपीडी के चीफ कांस्टेबल स्टीव राय और सुपरिंटेंडेंट माइक रिची इस जांच, आरोपों और गिरफ्तारियों से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी देंगे। पुलिस द्वारा कथित आचरण को लेकर दिया गया कोई भी बयान तब तक केवल आरोप ही रहेगा जब तक कि वह अदालती प्रक्रिया के जरिए साबित न हो जाए। दोसांझ ने अपने वकील के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे निर्दोष हैं और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही उनके बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किया जाएगा।
यह मामला इसलिए भी जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है क्योंकि दोसांझ का पेशेवर करियर और सामुदायिक कार्य पूरी तरह से पुलिसिंग, एंटी-गैंग अभियानों और युवा कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा है। फिर भी, आपराधिक आरोप लगने का अर्थ दोषसिद्धि नहीं होता। जब तक अदालत में दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक दोसांझ और गिल को कानूनन निर्दोष ही माना जाएगा।
