राम मंदिर दान मामले की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को जबरन कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। गाजियाबाद पुलिस ने कथित रोड-रेज घटना के संबंध में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने इंदिरापुरम थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली उपाध्याय की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा।

अदालत ने पत्रकार को एफआईआर रद्द कराने की मांग के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने को भी कहा और मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की।

इस बीच, पीठ ने आदेश दिया कि मौजूदा एफआईआर या अदालत की जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ दर्ज किसी अन्य एफआईआर के संबंध में उपाध्याय के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई न की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर की एक प्रति उपाध्याय को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया और गाजियाबाद के पुलिस अधीक्षक से अनुपालन हलफनामा मांगा।

पत्रकार ने उत्पीड़न का आरोप लगाया
यूट्यूब चैनल चलाने वाले उपाध्याय ने आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था कि इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि 20 अगस्त की देर रात एक पुलिस टीम उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बताया कि रोड-रेज तथा अभद्र व्यवहार के आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है।

पत्रकार ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई उत्तर प्रदेश में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर उनकी स्वतंत्र रिपोर्टिंग से जुड़ी है। इसमें अयोध्या राम मंदिर से संबंधित दान के प्रबंधन को लेकर उनकी पहले की रिपोर्ट भी शामिल हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआत में उन्हें एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। साथ ही, आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी स्थानीय दुकानदारों से घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज हटाने के लिए कह रहे थे।

शिप्रा मॉल के पास हुआ विवाद
याचिका के अनुसार, कथित रोड-रेज की घटना 18 अगस्त को गाजियाबाद में शिप्रा मॉल के पास हुई थी। उपाध्याय ने कहा कि एक मोटरसाइकिल सवार कथित तौर पर उनकी कार से टकरा गया और बाद में उसने पुलिस के आपातकालीन नंबर 112 पर संपर्क किया।

याचिका के मुताबिक, इसके बाद इंदिरापुरम थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

उपाध्याय ने एफआईआर रद्द करने की मांग की है। वैकल्पिक रूप से उन्होंने जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से कानूनी कार्यवाही जारी रहने तक पत्रकार को अस्थायी संरक्षण मिल गया है। उपाध्याय की ओर से लगाए गए आरोपों पर न्यायिक विचार होना बाकी है, जबकि पुलिस जांच और संबंधित अदालत में कार्यवाही अभी पूरी नहीं हुई है।

By Rajeev Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *