शिमला (राजीव शर्मा): हिमाचल प्रदेश में 20 और 21 अगस्त को बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है, जबकि राज्य मौजूदा मानसून सीजन से हुए भारी नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है। मौसम विभाग ने हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा बना हुआ है।
खराब मौसम के इस लंबे दौर के कारण राज्य भर में लगभग ₹1,033 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। लोक निर्माण विभाग (PWD) सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जिसने अपनी संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को करीब ₹750 करोड़ के नुकसान की जानकारी दी है।
मानसून के कारण जानमाल का भी भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या 205 तक पहुंच गई है, जिनमें से 121 मौतें सड़क हादसों के कारण हुईं। बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक घटनाओं ने रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंचाई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में 85 मकान पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जबकि 323 अन्य आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा चौदह दुकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।
मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
21 अगस्त तक बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने संवेदनशील स्थानों पर रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पहाड़ी इलाकों में अचानक होने वाले भूस्खलन और बाढ़ से बड़ा खतरा पैदा हो सकता है, विशेष रूप से तेज या लगातार बारिश के दौरान।
22 अगस्त से स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है, जब मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने का अनुमान है। मौसम विज्ञान विभाग ने 22 से 25 अगस्त के बीच राज्य के लिए कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की है, हालांकि कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है।
मौसमी औसत से कम रही बारिश
बारिश के तेज दौर से हुई तबाही के बावजूद, इस मानसून में हिमाचल प्रदेश में समग्र रूप से सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
1 जून से 19 अगस्त तक राज्य में 500.4 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 535.4 मिमी है। यह 7% की कमी को दर्शाता है।
ये विपरीत आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि सीमित समय में होने वाली भीषण बारिश किस प्रकार भारी तबाही मचा सकती है, भले ही पूरे सीजन की कुल बारिश सामान्य से कम रही हो। बारिश के नए दौर को देखते हुए राज्य प्रशासन लगातार संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है।
