नई दिल्ली(राजीव शर्मा): आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की युवा जनसंख्या को एक बड़ा जनसांख्यिकीय अवसर बताते हुए कहा कि यदि युवाओं का सही दिशा में मार्गदर्शन और समर्थन किया जाए तो देश को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।
जनरेशन जेड के सदस्यों के साथ बातचीत में भागवत ने कहा कि यदि युवाओं की आकांक्षाओं और क्षमताओं को सावधानी से संभाला नहीं गया तो आज की युवा शक्ति भविष्य में सामाजिक चुनौती बन सकती है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आज का युवा देश की कामकाजी और कमाने वाली आबादी बनेगा। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि रोजगार को केवल पारंपरिक नौकरियों तक सीमित नहीं समझना चाहिए और ईमानदार श्रम के हर रूप के साथ गरिमा जुड़ी होनी चाहिए, जिसमें मैनुअल लेबर भी शामिल है।
भागवत ने युवा भारतीयों से आग्रह किया कि वे अपने विकास की समझ खुद विकसित करें और केवल अन्य देशों से अपनी तुलना न करें। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक स्थितियाँ, जनसंख्या, भौगोलिक संरचना और संसाधन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन या न्यूज़ीलैंड जैसे देशों से अलग हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी परिस्थितियों और आकांक्षाओं को दर्शाने वाले विकास मानदंडों की आवश्यकता है। देश को सोचने की जरूरत है कि वह किस तरह की प्रगति चाहता है और किस मानक से उसे परखा जाना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आर्थिक उन्नति से परे भारत की एक व्यापक जिम्मेदारी है और देश को दुनिया को बेहतर संतुलन खोजने में मदद करने वाले विचार देने चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास को केवल भौतिक लाभ या आय के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।
भागवत ने युवा उद्यमिता को भी एक महत्वपूर्ण मार्ग बताया। उन्होंने युवाओं को कठिनाइयों का सामना दृढ़ता से करने और अपने उद्यम शुरू करने का आत्मविश्वास विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बड़ी जनसंख्या और अपेक्षाकृत सीमित भौगोलिक क्षेत्र इसे उन देशों से अलग चुनौतियाँ देता है जिनके पास विशाल क्षेत्र या कम जनसंख्या घनत्व है। इसलिए अन्य देशों के लिए उपयुक्त समाधान बिना देश की विशेष आवश्यकताओं के परीक्षण के सीधे अपनाए नहीं जा सकते।
भागवत ने युवाओं को याद दिलाया कि वे भी एक दिन बुजुर्ग पीढ़ी बनेंगे और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने उन्हें तत्काल व्यक्तिगत हितों से परे देख कर भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं पर विचार करने की सलाह दी।
दोपहर में भागवत ने आरएसएस मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और वहां उन्होंने भारत की राष्ट्रीय पहचान और भविष्य के विकास से जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी बात की।
