चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह):आग कुछ ही मिनटों में बुझ सकती है, लेकिन उससे होने वाला नुकसान लंबे समय तक बना रह सकता है। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति के लिए आग की लपटों से बाहर निकलना सिर्फ शुरुआत होती है। इसके बाद बार-बार ड्रेसिंग, अलग-अलग मेडिकल प्रक्रियाएं, पुनर्निर्माण और महीनों तक चलने वाली रिकवरी का दौर शुरू होता है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना (MMSY) के तहत पंजाब में बर्न ट्रीटमेंट से जुड़े ताजा आंकड़े इसी लंबी चुनौती को सामने रखते हैं। योजना के तहत ₹1.39 करोड़ की लागत से जलने की चोट से संबंधित 265 उपचार कैशलेस उपलब्ध कराए गए हैं।
24 वर्षीय अर्जुन कुमार उस समय घायल हो गए, जब उनके घर में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। उन्हें इलाज के लिए बठिंडा ले जाया गया, जहां करीब ₹50,000 का उपचार योजना के तहत कैशलेस उपलब्ध कराया गया। अपने अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा, “सब कुछ बहुत तेजी से हुआ।” इलाज कैशलेस होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बताया कि अस्पताल के खर्च की चिंता करने के बजाय वह अपना ध्यान स्वास्थ्य लाभ पर केंद्रित कर सके।
पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 31 से 45 वर्ष की आयु के पुरुषों के 61 उपचार किए गए, जो सभी आयु वर्गों में सबसे अधिक हैं। इन उपचारों पर ₹31.82 लाख खर्च हुए। वहीं, 0 से 18 वर्ष की आयु के लड़कों के 39 और इसी आयु वर्ग की लड़कियों के 27 उपचार किए गए।
महिलाओं में 19 से 30 वर्ष की आयु वर्ग में सबसे अधिक 26 उपचार दर्ज किए गए, जबकि 31 से 45 वर्ष की महिलाओं के 21 उपचार हुए। आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना का लाभ उठाने वाले मरीजों में बच्चों, युवाओं और कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या उल्लेखनीय रही।
पंजाब के ये आंकड़े बर्न इंजरी के लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों से जुड़े मेडिकल रिसर्च के निष्कर्षों से भी मेल खाते हैं। PubMed में दर्ज एक अध्ययन के अनुसार, पंजाब के एक टर्शियरी अस्पताल में बर्न इंजरी से पीड़ित 892 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 79 प्रतिशत मरीज 15 से 45 वर्ष की आयु के थे। यह दर्शाता है कि जलने की घटनाएं लोगों को उनकी कामकाजी उम्र में गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययन में भारत में सुलभ और किफायती बर्न केयर की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “जलने की चोट आग बुझने के साथ खत्म नहीं होती। कई मरीजों के लिए स्वास्थ्य लाभ का मतलब बार-बार होने वाली मेडिकल प्रक्रियाएं, रिहैबिलिटेशन और लंबे समय तक देखभाल होता है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि इन परिवारों के लिए आर्थिक परेशानी एक और चोट न बन जाए।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मरीजों को इलाज का खर्च जुटाने की चिंता के बजाय अपनी सेहत, रिकवरी और जीवन को दोबारा पटरी पर लाने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलनी चाहिए।
आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण उपचारों में से एक पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर से संबंधित है। इसके तहत 75 उपचार किए गए, जिन पर ₹38.90 लाख खर्च हुए।
पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर जलने की चोट के बाद बनने वाले स्कार टिश्यू के सिकुड़ने के कारण हो सकता है। इससे शरीर की गतिविधियां सीमित हो जाती हैं और रोजमर्रा के सामान्य काम करना भी मुश्किल हो सकता है। यानी बर्न इंजरी का असर त्वचा के ठीक होने के काफी समय बाद तक भी बना रह सकता है।
अन्य उपचार प्रक्रियाओं में शरीर की कुल सतह के जले हुए हिस्से का उपचार, टिश्यू एक्सपैंडर, बिजली और रसायनों से होने वाली जलन का उपचार, एंटीबायोटिक ड्रेसिंग, स्किन फ्लैप, डिब्राइडमेंट तथा कान और नाक का पुनर्निर्माण शामिल हैं। ये उपचार केवल सुंदरता से जुड़ी समस्याओं तक सीमित नहीं हैं। कई मरीजों के लिए ये उनकी गतिशीलता, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास को वापस पाने के लिए जरूरी होते हैं।
आंकड़ों में शामिल जिलों में बठिंडा में सबसे अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए। यहां 57 लोगों को 63 उपचार उपलब्ध कराए गए, जिन पर ₹33.51 लाख खर्च हुए। इसके बाद फरीदकोट में 40 और पटियाला में 39 लाभार्थी दर्ज किए गए। वहीं, रूपनगर, एसएएस नगर और फतेहगढ़ साहिब में सबसे कम, एक-एक लाभार्थी दर्ज किया गया।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि उपचार से जुड़े आंकड़े जलने से पीड़ित मरीजों, खासकर बच्चों, युवाओं और कामकाजी उम्र के लोगों को समय पर व्यापक उपचार उपलब्ध कराने की अहमियत को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा, “जलने की घटना कुछ ही सेकंड में किसी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ में अक्सर काफी ज्यादा समय लगता है। ऐसे में बर्न मरीज के लिए कैशलेस इलाज का महत्व बहुत व्यावहारिक है। जब आग आखिरकार बुझ जाती है, तो परिवार को एक और आग यानी अस्पताल के भारी बिल का सामना नहीं करना पड़ता।”
