वाशिंगटन, डी.सी. (राजीव शर्मा): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के साथ सशस्त्र संघर्ष के बजाय कूटनीति को अपने प्रशासन की प्राथमिकता बताया है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दोनों देशों के बीच जारी तनाव को संबोधित करते हुए, ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत का रास्ता चुनने से ठीक पहले संयुक्त राज्य अमेरिका एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत करने की कगार पर था। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने अनावश्यक नुकसान को रोकने के लिए बल प्रयोग के बजाय जानबूझकर संवाद को चुना।
ट्रंप के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने बातचीत के लिए संपर्क किया था और वाशिंगटन से नियोजित सैन्य कार्रवाई न करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान ने बाद में सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई अनुरोध करने से इनकार कर दिया, जिसे उन्होंने एक विरोधाभासी स्थिति बताया।
अमरीकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि विरोधाभासी बयानों के बावजूद, ईरान अमेरिका की सैन्य क्षमताओं और इस मुद्दे पर उसकी गंभीरता से भली-भांति वाकिफ था।
ट्रंप ने दोहराया कि हालांकि उनका प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान के लिए तैयार है, लेकिन ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर उसका रुख नहीं बदला है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमरीकी विदेश नीति का एक प्रमुख उद्देश्य बना हुआ है।
उनकी यह टिप्पणी अमरीका-ईरान संबंधों के भविष्य पर बनी अनिश्चितता के बीच आई है, जहाँ राजनयिक प्रयास और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं अंतर्राष्ट्रीय चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई हैं। बातचीत में शामिल होने की इच्छा का संकेत देने के साथ ही, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मूल सुरक्षा मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वाशिंगटन दबाव बनाना जारी रखेगा।
