नई दिल्ली/मॉस्को (राजीव शर्मा): भारत और रूस अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के प्रयासों को तेज कर रहे हैं। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा है कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $100 बिलियन तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजदूत ने उल्लेख किया कि पारंपरिक क्षेत्रों में व्यापार का विस्तार करने के साथ-साथ दोनों सरकारें आर्थिक सहयोग के नए रास्ते भी तलाश रही हैं।
ऊर्जा सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कुमार ने कहा कि परमाणु क्षेत्र में साझेदारी सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि रोसाटॉम (Rosatom) कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर काम जारी रखे हुए है, जहां यूनिट 3 और 4 के निर्माण में काफी प्रगति हुई है, जो स्वच्छ ऊर्जा में दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करती है।
राजदूत ने रूस में भारतीय पेशेवरों की बढ़ती मौजूदगी की ओर भी इशारा किया और इसे द्विपक्षीय संबंधों में हाल के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक बताया। उनके अनुसार, रूसी उद्योगों में कार्यरत कुशल भारतीय श्रमिकों की संख्या पिछले तीन वर्षों में तेजी से बढ़ी है—जो अनुमानित 10,000–15,000 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई है—जो रोजगार के बढ़ते अवसरों और औद्योगिक सहयोग को दर्शाती है।
कुमार ने कहा कि व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के अगले सत्र में चल रही पहलों की समीक्षा किए जाने और दोनों देशों को दशक के अंत तक अपने महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करने के लिए नए उपायों की पहचान करने की उम्मीद है।
बहुपक्षीय जुड़ाव के बारे में बोलते हुए राजदूत ने नई दिल्ली में आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को संबंधों को मजबूत करने का एक और महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि रूस ने ब्रिक्स बैठकों में लगातार उच्च स्तरीय भागीदारी बनाए रखी है। उन्होंने आगे जोड़ा कि इस समूह के भीतर सहयोग दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का पूरक है।
राजदूत ने यह भी ध्यान दिलाया कि 2027 में भारत और रूस के बीच राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे होंगे। इस मील के पत्थर को यादगार बनाने के लिए, दोनों सरकारें वाणिज्य, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई शहरों में कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की योजना बना रही हैं।
कुमार ने कहा कि व्यापार, ऊर्जा, कार्यबल की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में अपनी बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए नई दिल्ली और मॉस्को की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
