राम गोपाल यादव बोले- ‘वंदे मातरम्’ पर विवाद नहीं होना चाहिए, नया संस्करण बहुत लंबा

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता राम गोपाल यादव ने शुक्रवार को कहा कि वंदे मातरम् को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए, लेकिन नए विस्तारित संस्करण को उन्होंने अनावश्यक रूप से लंबा और लोगों के लिए याद रखना कठिन बताया।

संसद द्वारा ‘प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) बिल, 2026’ पारित किए जाने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए यादव ने कहा कि वंदे मातरम् का भारत की स्वतंत्रता संग्राम में गर्वपूर्ण स्थान है और इसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने यह नारा जेलों और ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई में गोलियों के सामने भी बुलंद किया।

साथ ही उन्होंने गाने के विस्तार के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि मूल संस्करण सरल, स्मरणीय और व्यापक रूप से जाना जाता था।
“पहला संस्करण संक्षिप्त और पढ़ने में आसान था। अब यह इतना लंबा हो गया है कि जिन्हें यह बदलाव लागू करना था वे भी इसे याद करने में संघर्ष करते हैं, और सुनने वालों को भी कठिनाई होती है,” उन्होंने कहा।

राम मंदिर दान मामले उठाया
यादव ने राम मंदिर के लिए प्राप्त दान में कथित अनियमितताओं पर चर्चा की मांग भी की और कहा कि यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उनका तर्क था कि यह मामला केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है बल्कि भारत व विदेशों में लाखों राम भक्तों के आस्था से जुड़ा है।
कथित वित्तीय अनियमितताएँ अब तक जो सामने आई हैं उससे कहीं अधिक बड़ी हो सकती हैं, उन्होंने कहा और आरोप लगाया कि केवल इसका एक छोटा हिस्सा ही प्रकाश में आया है तथा सरकार संसद में विस्तृत बहस से बच रही है।

पर्चा लीक के खिलाफ कार्रवाई का स्वागत
परीक्षा सुधारों और पर्चा लीक मामलों पर सरकार की कड़ी कार्रवाई की प्रतिबद्धता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर टिप्पणी करते हुए यादव ने इसे स्वागत योग्य बताया और कहा कि इसमें शामिल हर एक व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
“यदि प्रधानमंत्री ने कहा है कि पर्चा लीक के लिए जिम्मेदार किसी को नहीं बख्शा जाएगा, तो यह सकारात्मक कदम है। हर दोषी को कार्रवाई का सामना करना चाहिए,” उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल
इस बीच, समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर संसदीय चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री दोनों की अनुपस्थिति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कानून के महत्व को देखते हुए देश के शीर्ष नेतृत्व की सदन में मौजूदगी इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती।

गौरतलब है कि संसद ने गुरुवार को ‘प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) बिल, 2026’ और ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशंस (अनफ़ेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ दोनों पारित किए, जिससे राष्ट्रीय गौरव और परीक्षा ईमानदारी से जुड़े कड़े कानूनी प्रावधानों का मार्ग साफ हुआ।

By Rajeev Sharma

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