नई दिल्ली(राजीव शर्मा): केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 इथेनॉल-मिक्स्ड पेट्रोल नीति से उन्हें और उनके परिवार को जोड़कर बनाई गई कथित मानहानिकारक AI-जनित सामग्री के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। इस कदम से वह विवाद और तेज़ हो गया है जो सोशल मीडिया और राजनीतिक मंडलों में तेज़ी से फैल रहा है।
गिरफ्तारी की अनुमति और अगला सुनवाई
कोर्ट ने 27 जुलाई को गडकरी को सिविल मुक़दमा दायर करने की अनुमति दी; मामला 5 अगस्त को सविंधानिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। यह कानूनी कार्रवाई महीनों से चल रहे ऑनलाइन अभियान, मीम्स, AI-जनित वीडियोज़ और डीपफेक्स के बाद आई है जो, मंत्री के अनुसार, उन्हें सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का निर्माता और प्रमुख लाभार्थी दिखाते हैं।
मामले की मुख्य दलील
गडकरी की याचिका का आधार यह है कि उन्हें भारत के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का अग्रदूत बताया जा रहा है। मंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि यह नीति पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा प्रशासित है, जबकि उनके मंत्रालय—सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH)—का कार्य वाहन मानकों और सड़क परिवहन से सम्बंधित मुद्दों तक सीमित है।
याचिका में कहा गया है कि मैनिपुलेटेड वीडियो, AI-जनित सामग्री और डीपफेक्स ने उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक साख को नुकसान पहुँचाया है और यह गलत धारणा बनाई गई कि गडकरी और उनका परिवार सरकार के E20 फैसले से वित्तीय लाभान्वित हुए। याचिका में आरोप है कि यह सामग्री जनता को गुमराह करने तथा गडकरी को निजी लाभ के लिए इथेनॉल को बढ़ावा देने वाला दिखाने के लिए तैयार की गई थी।
संसद में मंत्रालयों का जवाब
मानसून सत्र के दौरान संसदीय उत्तरों में भी दोनों मंत्रालयों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दिया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े करीब 15 प्रश्नों के उत्तर दिए, जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय ने मुख्यतः वाहन संगतता और सुरक्षा से जुड़े कुछ ही सवालों के जवाब दिए। एक लिखित उत्तर में सड़क परिवहन मंत्रालय ने भी कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा प्रशासित है, जो गडकरी के उस दावे को बल देता है कि उनकी जिम्मेदारी नीति बनाना या लागू करना नहीं है।
क्यों नाम आए Meta, X और Google
गडकरी ने व्यक्तिगत सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह ठहराने की माँग की है, जिनपर कथित रूप से मानहानिकारक और AI-जनित सामग्री फैलने दी गई। याचिका कथित तौर पर यह तर्क रखती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर fabricated और misleading कंटेंट के प्रसार को रोकने की जिम्मेदारी है, जैसा कि भारत के सूचना प्रौद्योगिकी ढाँचे में अपेक्षित है। मुक़दमा Meta, X और Google की भूमिका की न्यायिक जांच की माँग करता है कि उन्होंने मैनिपुलेटेड वीडियो और डीपफेक्स को फैलने से कैसे रोका या नहीं।
राजनीतिक हमले और आरोप
यह मुक़दमा लगभग एक साल के विरोध के बाद आया है, जब अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल देशभर में डिफ़ॉल्ट ईंधन बन गया। कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने बार-बार सवाल उठाए कि क्या यहाँ हितों का टकराव है, और आरोप लगाया कि गडकरी के परिवार के सदस्यों के इथेनॉल उत्पादन व्यवसायों से कनेक्शन हैं। विपक्ष का कहना रहा कि इथेनॉल उत्पादन के तेज़ विस्तार और गडकरी की सार्वजनिक वकालत हितों के टकराव का आभास देता है। मंत्री ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है।
गडकरी के जवाब
गडकरी ने बार-बार कहा है कि इथेनॉल की खरीद, मूल्य निर्धारण, ब्लेंडिंग लक्ष्य और अनुबंध पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा तय किए जाते हैं और इन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलती है, न कि उनके मंत्रालय द्वारा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार का इथेनॉल उत्पादन भारत के कुल उत्पादन का केवल एक छोटा हिस्सा है और आलोचकों पर राजनीतिक प्रेरित अभियान चलाने का आरोप लगाया है।
‘E20 हटाओ’ अभियान और सड़कों पर प्रभाव
विवाद अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर व्यापक ऑनलाइन आंदोलन में बदल गया है। “E20 हटाओ” नारा लगाने वाले अभियानों ने उपभोक्ताओं को E20 के साथ-साथ 100% पेट्रोल खरीदने का विकल्प माँगा है। “E20 जनता पार्टी” नामक एक समूह ने उपभोक्ता विकल्प, पारदर्शी ईंधन लेबलिंग और इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है। दिल्ली टैक्सी और टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भी गैर‑ब्लेंडेड पेट्रोल की वापसी, स्पष्ट लेबलिंग और स्वतंत्र समीक्षा की माँग की है और संसद तक मार्च का प्रस्ताव रखा है।
सरकार का कहना: E20 वाहनों के लिये सुरक्षित है
सड़क परिवहन मंत्रालय ने संसद में दोहराया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा किए गए अध्ययनों में E20 उपयोग करने पर वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। मंत्रालय के अनुसार ज्यादातर मौजूदा वाहनों को E20 के उपयोग के लिए इंजन संशोधन की आवश्यकता नहीं है, हालाँकि कुछ पुराने BS‑III वाहन सामान्य सर्विसिंग के दौरान कुछ रबर कंपोनेंट्स बदलवाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
अगला चरण
जैसे‑जैसे यह कानूनी लड़ाई आगे बढ़ेगी, मामला सामाजिक मीडिया प्लेटफार्मों की AI-जनित और कथित मानहानिकारक सामग्री को मॉडरेट करने की जिम्मेदारियों की परीक्षा बनेगा और साथ ही इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति तथा वैकल्पिक ईंधनों की सरकार की पहल पर बहस को फिर से भगा सकता है।
