रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्री पद से दिया इस्तीफा, पंजाब में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्र के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत यह इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू होता है।

बिट्टू राज्य मंत्री (रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय) के पद पर थे। उनका यह कदम 21 जून को उनकी राज्यसभा अवधि पूरी होने के बाद आया, जब भाजपा ने उन्हें ऊपरी सदन के लिए पुन: नामांकित नहीं किया।

पार्टी द्वारा 18 जून को हुए राज्यसभा चुनावों में उन्हें मैदान में न उतारने के फैसले के बाद उनके कैबिनेट से हटने की पूर्वानुमानित रही। इससे पहले भी मत्स्य पालन मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपनी राज्यसभा अवधि खत्म होने के बाद मंत्रिमंडल छोड़ दिया था।

मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, बिट्टू को अब उनके मंत्री पद की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है और उन्हें 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर भाजपा में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिका सौंपी जाने की उम्मीद है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कदम पंजाब में भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति को दर्शाता है। बिट्टू को राज्य के प्रमुख सिख नेताओं में गिना जाता है और उनके पास व्यापक संसदीय अनुभव है।

राजस्थान से राज्यसभा में जाने से पहले बिट्टू लुधियाना और आनंदपुर साहिब से लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर कई वर्षों का है और वह पंजाब की राजनीतिक तस्वीर में एक परिचित चेहरा हैं।

यह 50 वर्ष के नेता एक प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से आते हैं। वे पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बींट सिंह के पौत्र हैं, जिनकी विरासत राज्य की राजनीति में प्रभाव रखती है।

जबकि बिट्टू का मंत्री पद का कार्यकाल समाप्त हो गया है, पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनकी राजनीतिक जिम्मेदारियाँ केंद्र सरकार से हटकर पंजाब में भाजपा संगठन सुदृढ़ करने की ओर झुक सकती हैं।

By Rajeev Sharma

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