जलवायु जोखिम से किसानों को सुरक्षा, फसल बीमा पर सरकार का बड़ा फोकस

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) मुख्यतः ‘क्षेत्रगत दृष्टिकोण (Area Approach)’ के आधार पर कार्यान्वित की जाती हैं, जिसमें दावों का निर्धारण उस भूमि क्षेत्र पर किया जाता है जो बीमित फसल की वास्तविक उपज में कमी के आधार पर संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत की जाती है। यह आकलन फसल कटाई प्रयोग (CCE) तथा यस-टेक के अंतर्गत प्रौद्योगिकी आधारित उपज अनुमान (जहाँ लागू हो) के आधार पर किया जाता है, जिसे योजना के परिचालन दिशा-निर्देशों में निर्दिष्ट सीमा उपज (थ्रेशहोल्ड यील्ड) से तुलना कर निर्धारित किया जाता है।

हालाँकि, ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलप्लावन, बादल फटने एवं प्राकृतिक आग जैसे स्थानीयकृत जोखिमों तथा चक्रवात, चक्रवाती/बेमौसम वर्षा एवं ओलावृष्टि से फ़सलोपरांत होने वाले नुकसान का आकलन PMFBY एवं RWBCIS के अंतर्गत व्यक्तिगत बीमित खेत के आधार पर किया जाता है। ऐसे मामलों में नुकसान की सीमा तथा दावों का आकलन योजना के प्रचालन दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निर्धारित समय-सीमा के भीतर राज्य सरकार तथा संबंधित बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों वाली संयुक्त समिति द्वारा किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (NPDM) के अनुसार, राज्य सरकारें प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित मदों एवं मानदंडों के अनुरूप राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से राहत उपाय करती हैं। ‘गंभीर प्रकृति’ की आपदा की स्थिति में SDRF से सहायता के अतिरिक्त राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) के दौरे के आधार पर आकलन भी शामिल होता है।

फील्ड स्तर पर SDRF के अंतर्गत नुकसान का आकलन राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त सर्वेक्षण से किया जाता है। इनपुट सब्सिडी केवल तभी देय होती है जब फसल नुकसान का आकलन 33% या उससे अधिक हो। SDRF के लिए राज्य स्वयं आकलन करता है, जबकि NDRF सहायता हेतु राज्य भारत सरकार को ज्ञापन प्रस्तुत करता है, जिसके बाद IMCT क्षेत्र का दौरा कर नुकसान का भौतिक सत्यापन करता है।

SDRF एवं NDRF के अंतर्गत नुकसान का आकलन केवल राज्य के विशिष्ट क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के दौरान किया जाता है और यह जिला स्तर पर नियमित फसल नुकसान आकलन नहीं है। अतः इसकी तुलना PMFBY एवं RWBCIS के अंतर्गत निपटान किए गए दावों से नहीं की जा सकती।

भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत दावों के समयबद्ध निपटान हेतु निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) का विकास एकल डेटा स्रोत के रूप में किया है, जिससे सब्सिडी भुगतान, सूचना प्रसार, सेवाओं की आपूर्ति जैसे किसानों का ऑनलाइन नामांकन, व्यक्तिगत बीमित किसान का विवरण अपलोड/प्राप्त करना तथा सरकार ने व्यक्तिगत बीमित किसान के बैंक खाते में दावा राशि का इलेक्ट्रॉनिक अंतरण संभव हो सके।
दावा संवितरण प्रक्रिया की कठोर निगरानी हेतु दावों के भुगतान के लिए ‘डिजिक्लेम मॉड्यूल’ नामक विशेष मॉड्यूल प्रारंभ किया गया है, जो खरीफ 2022 से लागू है। इसमें राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) का सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) एवं बीमा कंपनियों की लेखा प्रणाली से एकीकृत किया गया है ताकि सभी दावों का समयबद्ध एवं पारदर्शी निपटान हो सके।
खरीफ 2024 से, यदि बीमा कंपनी द्वारा समय पर भुगतान नहीं किया जाता है तो NCIP के माध्यम से स्वतः 12% जुर्माना की गणना एवं वसूली की जाती है।
केंद्र सरकार के प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य सरकारों के हिस्से से अलग कर दिया गया है ताकि किसानों को केंद्र सरकार के हिस्से से संबंधित आनुपातिक दावों का भुगतान प्राप्त हो सकें।
खरीफ 2025 से राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के हिस्से की देरी से रिलीज पर भी 12% जुर्माना लगाया जाता है।
योजना के प्रावधानों के अनुसार खरीफ 2025 से वित्तीय अनुशासन हेतु संबंधित राज्य सरकार द्वारा अग्रिम में अपने प्रीमियम हिस्से को जमा करने हेतु एस्क्रो खाता (ESCROW Account) खोलना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, योजना के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी के उपयोग की दिशा में, किसानों को दावों के समयबद्ध निपटान में सुधार हेतु CCE Agri-App के माध्यम से उपज आंकड़े/फसल कटाई प्रयोग (CCE) आंकड़े एकत्र करने तथा NCIP पर अपलोड करने, बीमा कंपनियों को CCE के संचालन की अनुमति देने, राज्य भू-अभिलेखों का NCIP के साथ एकीकरण करने तथा यस-टेक के माध्यम से रिमोट सेंसिंग आधारित उपज आकलन के उपयोग जैसे विभिन्न कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं।
क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) एक डिजिटल मोबाइल एप्लिकेशन के रूप में विकसित किया गया है ताकि PMFBY के तहत एकल खेत और भू-खंडों के लिए स्थानीय आपदाओं/फसलोपरांत नुकसान के आकलन को सरल और अधिक सटीक बनाया जा सके। इस योजना के तहत सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए CLAP का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में दी।

By Rajeev Sharma

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