कारवार (कर्नाटक)(राजीव शर्म): एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने बुधवार को कहा कि भविष्य के संघर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं के बीच सहज समन्वय जरूरी होगा, क्योंकि आधुनिक युद्ध अब अलग-अलग सैन्य सेवाओं द्वारा स्वतंत्र रूप से नहीं लड़ा जा सकता।
आईएनएस मलवन, माही-श्रेणी के दूसरे एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC), के कमीशनिंग समारोह में बोलते हुए भारतीय वायुसेना प्रमुख ने संयुक्त सैन्य अभियानों, तेज तकनीकी विकास और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
‘एक राष्ट्र, एक लड़ाकू बल’
वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों, नौसैनिक कर्मियों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना को एकीकृत बल की तरह काम करना होगा ताकि बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया जा सके।
उन्होंने कहा, “कोई भी भविष्य का युद्ध किसी एक सेवा द्वारा नहीं लड़ा जाएगा। चाहे हम नीले, सफेद या ऑलिव ग्रीन रंग की वर्दी पहनें, हमें एक राष्ट्र के रूप में साथ लड़ना होगा। तभी हम सफल हो सकेंगे।”
उन्होंने कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की स्थापना के बाद से सशस्त्र बलों के बीच एकीकरण को काफी गति मिली है और उन्हें विश्वास है कि यह संयुक्तता भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी।
रक्षा तकनीक में तेजी
एयर चीफ ने स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और उत्पादन को तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया और चेतावनी दी कि तकनीक में देरी सैन्य तैयारियों को कमजोर कर सकती है।
उन्होंने कहा, “तकनीक में देरी, तकनीक से वंचित होने के बराबर है।”
उन्होंने माना कि भारत की स्वदेशी शोध और निर्माण क्षमता काफी बेहतर हुई है, लेकिन शेष तकनीकी अंतर को पाटने के लिए तेज़ी से काम करना जरूरी है।
नौसेना से सीख
भारतीय नौसेना की स्वदेशी जहाज निर्माण सफलता की सराहना करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि वायुसेना को भी विमानन क्षेत्र में ऐसा ही दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि नौसैनिक अधिकारी जहाज निर्माण परियोजनाओं से योजना चरण से लेकर क्रियान्वयन तक जुड़े रहते हैं, जिससे ऐसी संस्थागत विशेषज्ञता बनती है जो सेवानिवृत्ति के बाद भी बनी रहती है।
उनके अनुसार, ऐसा ही मॉडल अपनाने से वायुसेना की Atmanirbhar Bharat की यात्रा को काफी मजबूती मिलेगी।
समुद्री सुरक्षा का महत्व
एयर चीफ ने भारत की वृद्धि के लिए समुद्री सुरक्षा को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग व्यापार, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय समृद्धि के लिए जरूरी हैं।
उन्होंने किसी विशेष वैश्विक संघर्ष का उल्लेख किए बिना कहा कि हाल की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार की अहमियत को और स्पष्ट किया है।
उन्होंने भारतीय नौसेना की भारत के समुद्री संपर्क मार्गों की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भूमिका की सराहना की।
आईएनएस मलवन की खासियत
भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता को रेखांकित करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि आईएनएस मलवन में मूल्य के हिसाब से लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है, जो सरकार की Atmanirbhar Bharat पहल की सफलता का मजबूत उदाहरण है।
उन्होंने भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड को जहाज की सफल डिलीवरी पर बधाई दी और कहा कि यह इस वर्ष नौसेना का सातवां युद्धपोत है जिसे कमीशन किया गया है।
करवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत आयोजित इस समारोह में वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी, पूर्व सैनिक और कोचीन शिपयार्ड के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
