होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बाद अमेरिका ने फिर ईरानी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना; नाजुक युद्धविराम पर संकट

वॉशिंगटन (राजीव शर्मा): संयुक्त राज्य अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरानी ठिकानों पर सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू किया। अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों का सीधा जवाब है।

यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह अभियान कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग (जहाजों के आवागमन) को खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता से जुड़े सैन्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित था। निशानों में तटीय रक्षा प्रणालियां, रडार प्रतिष्ठान, एंटी-शिप मिसाइल लॉन्च साइट, कमांड सेंटर और दर्जनों फास्ट अटैक बोट (तेज हमलावर नावें) शामिल थीं, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्हें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा संचालित किया जा रहा था।

ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास, सिरिक और केश्म द्वीप सहित कई दक्षिणी स्थानों पर विस्फोटों की सूचना दी है, हालांकि तेहरान में अधिकारियों ने तुरंत नुकसान के पैमाने पर विवरण जारी नहीं किया था।

जहाजों पर हमलों के लिए वॉशिंगटन ने ईरान को ठहराया जिम्मेदार

यह नवीनतम सैन्य कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक टैंकरों से जुड़ी सिलसिलेवार घटनाओं के बाद हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी बलों पर हाल के दिनों में कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया और इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बताया।

सेंटकॉम ने रुख बनाए रखा कि इन हमलों का उद्देश्य वाणिज्यिक नौवहन में हस्तक्षेप करने की ईरान की परिचालन क्षमता को कम करना और इस जलमार्ग से आवाजाही की स्वतंत्रता की रक्षा करना था। कमांड ने अपने बयान में कहा, “इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को डराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सैन्य क्षमताओं को बेअसर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।”

युद्धविराम पर बढ़ा दबाव

यह घटनाक्रम वॉशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों के टकराव के बाद शत्रुता को रोकने के लिए बनाए गए मौजूदा युद्धविराम ढांचे के बावजूद सामने आया है। हालांकि दोनों देश अभी भी अप्रत्यक्ष राजनयिक प्रयासों में लगे हुए हैं, लेकिन इस ताजा टकराव ने युद्धविराम के टिके रहने पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह अभियान रक्षात्मक प्रकृति का था और चेतावनी दी कि नागरिक जहाजों पर किसी भी आगे के हमले पर अतिरिक्त जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

दोनों पक्षों में बढ़ रहा है राजनीतिक दबाव

घरेलू मोर्चे पर आलोचना: इस नए तनाव ने दोनों देशों में राजनीतिक मतभेदों को भी तीव्र कर दिया है। ईरान में, कट्टरपंथी समूहों के कुछ हिस्सों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों की आलोचना की है और उन पर अनावश्यक रियायतें देने का आरोप लगाया है। रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन के खिलाफ सख्त जवाबी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं।

दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी कुछ राजनीतिक सहयोगियों की आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिनका तर्क है कि युद्धविराम व्यवस्था खाड़ी (Gulf) में आगे के टकरावों को रोकने में विफल रही है।

महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर वैश्विक चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा गलियारों में से एक बना हुआ है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा हर दिन गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी व्यवधान में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और शिपिंग ऑपरेशन्स को प्रभावित करने की क्षमता है।

सैन्य गतिविधि और राजनयिक वार्ता दोनों के एक साथ जारी रहने के बीच, विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिन यह तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे कि क्या युद्धविराम कायम रह सकता है या यह क्षेत्र फिर से तनाव के एक नए चक्र में फंस जाएगा।

By Rajeev Sharma

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