NCR का दायरा बढ़ा: राजस्थान के 5 ज़िले शामिल, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली(राजीव शर्मा ):राष्ट्रीय राजधानी के आसपास संतुलित शहरी विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमाओं का विस्तार करते हुए राजस्थान के अतिरिक्त क्षेत्रों को इसके दायरे में शामिल कर दिया है।

यह विस्तार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) अधिनियम, 1985 की अनुसूची में संशोधन के जरिए किया गया है, जो एनसीआर योजना बोर्ड के साथ विचार-विमर्श और राजस्थान सरकार की सहमति मिलने के बाद अधिसूचित किया गया है।

संशोधित अधिसूचना के अनुसार अब अलवर, खैरथल-तिजारा, भरतपुर और डीग ज़िलों को पूरी तरह एनसीआर में शामिल किया गया है। इसके अलावा, कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले के चुनिंदा हिस्सों को भी इस क्षेत्र के अंतर्गत लाया गया है।

कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले की तहसीलों में से बहरोड़, बांसूर, नीमराना, मांडन और नरायणपुर को एनसीआर ढांचे में शामिल किया गया है, जबकि कोटपूतली, विराटनगर और पावट तहसीलें फिलहाल एनसीआर की सीमा से बाहर ही रहेंगी।

नई अधिसूचना, 2013 से लागू राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों की पूर्व वर्गीकरण को प्रतिस्थापित करती है। अधिकारियों का मानना है कि संशोधित सीमाएँ क्षेत्र में बदलते विकास पैटर्न और दिल्ली महानगरीय क्षेत्र के साथ बढ़ते आर्थिक एकीकरण को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करती हैं।

इन ज़िलों को शामिल किए जाने से क्षेत्रीय स्तर पर अधिक समन्वित योजना निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है। इससे एकीकृत आधारभूत ढांचा परियोजनाएँ तैयार करने, परिवहन संपर्क बेहतर करने, भूमि उपयोग योजना को सुव्यवस्थित करने और नये अधिसूचित क्षेत्रों में टिकाऊ शहरी विस्तार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड, एनसीआर का हिस्सा बनने वाले राज्यों के बीच दीर्घकालीन विकास का समन्वय करता है, ताकि शहरी विस्तार, आधारभूत संरचना निर्माण और आर्थिक गतिविधियों की योजना संतुलित और समन्वित तरीके से बनाई जा सके।

इस विस्तार के साथ, केंद्र का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना और राजस्थान के उन तीव्र गति से विकसित हो रहे क्षेत्रों का समर्थन करना है, जहाँ राष्ट्रीय राजधानी के समीप होने के कारण औद्योगिक, आवासीय और वाणिज्यिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

By Rajeev Sharma

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