नई दिल्ली(राजीव शर्मा): ऑफ-रोड वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से केंद्रीय सरकार ने कृषि ट्रैक्टरों, पावर टिलर्स, कम्बाइन हार्वेस्टर और निर्माण उपकरण वाहनों (CEVs) के लिए नए उत्सर्जन मानक अधिसूचित किए हैं। संषोधित नियम 1 अक्टूबर, 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे और यह कृषि व इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों क्षेत्रों में साफ-सुथरी इंजन तकनीकों को बढ़ावा देंगे।
नये मानदंड केंद्रीय मोटर व्हीकल्स (ग्यारहवां संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से जारी किए गए हैं, जिन्हें मोटर व्हीकल्स अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जारी किया है।
साफ इंजन, सख्त सीमाएँ
नए ढांचे के तहत कृषि मशीनरी ट्रैक्टर उत्सर्जन मानक (TREM) स्टेज-V पर चली जाएगी, जबकि निर्माण उपकरणों के लिए CEV स्टेज-V मापदंड अनिवार्य होंगे। ये मानक कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोकार्बन (HC), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे हानिकारक प्रदूषकों के लिए अनुमति प्राप्त सीमाओं को उल्लेखनीय रूप से कड़ा करते हैं।
पहली बार, कण संख्या (PN) उत्सर्जन पर भी सीमा निर्धारित की गई है, जो अल्ट्रा-फाइन कणों को नियंत्रित करने का लक्ष्य है और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।
56 kW से 130 kW श्रेणी के इंजनों के लिए पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन को 0.015 g/kWh तक सीमित किया जाएगा, जो पिछले मानदंडों की तुलना में कड़े कटौती को दर्शाता है।
चरणबद्ध लागूकरण
लागू करने का शेड्यूल इंजन क्षमता के अनुसार भिन्न है। 56 kW से 560 kW और 8 kW से 19 kW रेंज के इंजन वाले ट्रैक्टर और कम्बाइन हार्वेस्टर को 1 अक्टूबर, 2026 से नए स्टेज-V मानदंडों का पालन करना होगा।
19 kW से 37 kW के बीच के इंजन अप्रैल 2028 में पहले एक मध्यवर्ती मानक पर जाएँगे और फिर अप्रैल 2032 में पूर्ण रूप से स्टेज-V अपनाएँगे। 37 kW से 56 kW श्रेणी के इंजनों के लिए भी अप्रैल 2032 से स्टेज-V लागू होगा।
56 kW से अधिक शक्ति वाले निर्माण उपकरणों को भी अक्टूबर 2026 से स्टेज-V मानदंडों का पालन करना होगा।
जीवनकाल भर उत्सर्जन की निगरानी
मुख्य बदलावों में से एक सेवा-के-समय (in-service) उत्सर्जन निगरानी की शुरुआत है, ताकि मशीनें बिक्री और संचालन के बाद भी प्रदूषण मानकों का अनुपालन करती रहें।
प्रमाणन के दौरान केवल प्रयोगशाला परीक्षण तक सीमित रहने के बजाय, अब चुनी हुई श्रेणियों के ट्रैक्टर और निर्माण उपकरणों को उनके परिचालन जीवन के दौरान परीक्षण के माध्यम से यह सत्यापित किया जाएगा कि उत्सर्जन निर्धारित सीमाओं के अंदर ही हैं।
स्वच्छ ईंधन के लिए समर्थन
नोटिफिकेशन कई ईंधन विकल्पों को कवर कर रहा है, जिनमें डीजल, CNG, बायो-CNG, बायोगैस, LNG, LPG, हाइड्रोजन, इथेनॉल मिश्रण, बायोडीजल और ड्यूल-फ्यूल इंजन शामिल हैं।
यह हाइड्रोजन-एनरिच्ड कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (HCNG) के तकनीकी विनिर्देश भी निर्धारित करता है, जिससे नॉन-रोड मशीनरी में साफ ईंधन तकनीकों को अपनाने के लिए नियामक समर्थन मिलता है।
उत्पादकों के लिए सख्त अनुपालन जांच
नए नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने उत्पादन अनुरूपता (Conformity of Production – CoP) तंत्र को मजबूत किया है। किसी इंजन परिवार के भीतर वार्षिक 200 से अधिक इंजन बनाने वाले निर्माताओं का हर वर्ष अनुपालन परीक्षण होगा, जबकि छोटे निर्माताओं का निरीक्षण हर दो वर्ष में किया जाएगा।
संशोधित नियम टिकाऊपन आवश्यकताओं, इंजन लेबलिंग मानदंडों और इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन व सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) जैसे उन्नत तकनीकों के परीक्षण प्रक्रियाओं को भी स्थापित करते हैं।
उद्योग को अनुकूलन, खरीदारों को लाभ
नए मानक निर्माताओं को इंजन पुनर्रचना और उन्नत उत्सर्जन नियंत्रक तकनीकों की स्थापना करने के लिए बाध्य करेंगे, जिससे ट्रैक्टर और भारी निर्माण उपकरण अधिक स्वच्छ और ईंधन-कुशल बनेंगे।
मुलायम संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नए मानदंड लागू होने से पहले निर्मित वाहनों के लिए नौ महीने की पंजीकरण अवधि दी है, ताकि निर्माताओं और डीलरों को मौजूदा इन्वेंटरी साफ़ करने का समय मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित उत्सर्जन मानक डीजल चालित कृषि एवं निर्माण मशीनरी से होने वाले प्रदूषण को कम करने में अहम भूमिका निभाएँगे और भारत के नियामक मानदंडों को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानकों के करीब लाएँगे। यह कदम उन क्षेत्रों में साफ तकनीकों के अपनाने को भी तेज करेगा, जो देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
