अमृतसर (गुरप्रीत सिंह): 16 जून को अमृतसर-कटड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस के शुभारंभ के साथ पंजाब और पवित्र नगरी श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा को जोड़ने वाला एक नया यात्रा गलियारा (ट्रैवल कॉरिडोर) चालू होने जा रहा है। इस प्रीमियम ट्रेन सेवा से जहाँ धार्मिक पर्यटन तेज होने की उम्मीद है, वहीं भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित कई जिलों के लिए कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार होगा।
रेलवे द्वारा जारी संशोधित परिचालन योजना के अनुसार, यह ट्रेन जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने से पहले बटाला, छीना, गुरदासपुर और पठानकोट सिटी से होकर गुजरेगी। इस रूट का इन क्षेत्रों के निवासियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया है, क्योंकि अब वे बड़े जंक्शनों पर जाए बिना ही देश की सबसे तेज़ ट्रेन सेवाओं में से एक का सीधा लाभ उठा सकेंगे।
आठ आधुनिक कोचों और यात्रियों के लिए उन्नत सुविधाओं के साथ डिज़ाइन की गई यह वंदे भारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन चलेगी। ट्रेन के रख-रखाव और तकनीकी जाँच के लिए शनिवार को यह सेवा बंद रहेगी।
समय-सारणी के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा से सुबह जल्दी रवाना होने के बाद यह ट्रेन दोपहर के आसपास अमृतसर पहुँचेगी, जबकि वापसी की यात्रा शाम को शुरू होगी और उसी रात देर से कटड़ा में समाप्त होगी।
श्रद्धालुओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ
इस ट्रेन की शुरुआत से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेम्पल) आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को लाभ होने की उम्मीद है, जिससे वे एक सुगम और आरामदायक रेल यात्रा के माध्यम से वैष्णो देवी मंदिर के लिए अपनी तीर्थयात्रा जारी रख सकेंगे। यह सेवा यात्रा के समय को कम करके और बेहतर सुविधा प्रदान करके पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों में पर्यटन को बढ़ावा दे सकती है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस विस्तारित रूट से यात्रियों की आवाजाही, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे गुरदासपुर, बटाला और पठानकोट की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से दोनों क्षेत्रों के बीच शैक्षिक और व्यावसायिक यात्रा को भी मदद मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले संशोधित समय-सारणी की जाँच कर लें और अधिकृत रेलवे बुकिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही अपना आरक्षण पूरा करें। अपनी शुरुआत के साथ, अमृतसर-कटड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक और आर्थिक गंतव्यों को जोड़ने वाली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों के बढ़ते नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।
