नई दिल्ली(राजीव शर्मा): बुधवार सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नई निचली कक्षा में पहुंच गया। इंटरबैंकों में इसका स्तर 96.90 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद भाव से करीब 20 पैसे कम है। मंगलवार को ही मुद्रा 96.70 पर बंद होकर इतिहास में सबसे निचला स्तर छू चुकी थी।
निवेश और मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार यह कमजोरी कई कारकों के मेल से आई है। मध्य-पूर्व के तनाव और वैश्विक मांग के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत के आयात खर्च को बढ़ा दिया है, जिससे रुपये पर दबाव बनता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में डॉलर में मजबूती बनी रहने से अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपया कमजोर दिखा। डॉलर इंडेक्स सुबह के सत्र में लगभग 99.26 पर ट्रेड कर रहा था।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की शुद्ध बिकवाली ने घरेलू पूंजी प्रवाह को कमजोर किया, जिससे शेयर बाजारों में भी दबाव आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स लगभग 517 अंक गिरकर करीब 74,667 पर और निफ्टी करीब 152 अंकों की गिरावट के साथ 23,475 के आसपास आ गया। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे परिदृश्यों में बाजार का मूड नकारात्मक रहता है और अल्पावधि में उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं।
आने वाले दिनों में निवेशक और व्यापारी तीन प्रमुख संकेतकों पर नजर रखेंगे: मध्य-पूर्व की घटनाक्रम, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के रुझान और अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा जारी होने वाले संकेत। इनमें किसी भी तरह के बड़े बदलाव से रुपए की विनिमय दर और शेयर बाजारों की दिशा में तेज़ बदलाव आ सकते हैं।
