दिल्ली (राजीव शर्मा):केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने 14 मई, 2026 को रांची में सीएमपीडीआई के कामकाज की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। समीक्षा बैठक में सीएमपीडीआई के सीएमडी श्री चौधरी शिवराज सिंह, सीसीएल के सीएमडी श्री नीलेन्दु कुमार सिंह, एमईसीएल के सीएमडी श्री आईडी नारायण, सीएमपीडीआई के तकनीकी निदेशक और सीएमपीडीआई, सीसीएल तथा एमईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
समीक्षा के दौरान, अन्वेषण, रिपोर्ट तैयार करने, पूंजीगत व्यय, अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं, सीएसआर पहलों और सौर परियोजनाओं जैसे विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में 2025-26 के दौरान सीएमपीडीआई के निष्पादन को 2026-27 के लक्ष्यों के साथ प्रस्तुत किया गया।
श्री दुबे ने सीएमपीडीआई के निष्पादन की सराहना की और देश की भावी ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों के महत्व के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों के कार्यनीतिक अन्वेषण पर बल दिया। इस अवसर पर सीसीएल के सीएमडी श्री नीलेन्दु कुमार सिंह, एमईसीएल के सीएमडी श्री आईडी नारायण उपस्थित थे। सीएमपीडीआई प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि वे खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाएं, पारदर्शिता बढ़ाएं और बाजार तक पहुंच में सुधार करें ताकि बड़ी संख्या में बोलीदाताओं की भागीदारी के कारण परियोजनाओं में देरी न हो।श्री दुबे ने स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी सामाजिक-आर्थिक अवसरों में खदान बंद करने के कार्यकलापों को रूपांतरित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, ताकि इन पुनः प्राप्त क्षेत्रों में फॉक्स नट्स (मखाना) की खेती और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा सके और इसे सरकार की “एक जिला, एक उत्पाद” (ओडीओपी) पहल के अनुरूप बनाया जा सके। इस दूरदर्शी दृष्टिकोण का उद्देश्य परित्यक्त खनन स्थलों को उत्पादक कृषि और मत्स्य पालन संपत्तियों में परिवर्तित करना है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए दीर्घकालिक, स्थायी आर्थिक सहायता सुनिश्चित हो सके।
इस बैठक में, केंद्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) ने 14 मई, 2026 को एमईसीएल (खनिज अन्वेषण एवं परामर्श लिमिटेड) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति में ऊर्जा एवं गैर-ऊर्जा खनिजों के लिए कोयला और खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में दोनों प्रमुख अन्वेषण एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इस सहयोगात्मक अन्वेषण गतिविधियों से कोयले और अन्य खनिजों के राष्ट्रीय भंडार में वृद्धि होने और देश में नई खानों के विकास को सुगम बनाने की उम्मीद है।
यह पहल भारत की खनिज संपदा के विकास में योगदान देकर और खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
