दिल्ली (राजीव शर्मा):केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व के संस्थान जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में नर्सिंग एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने इस दीक्षांत समारोह को स्नातक होने वाले विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने पेशेवर जीवन को सेवा, करुणा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित करने का आह्वान किया तथा कहा कि उनका योगदान देश की स्वास्थ्य प्रणाली के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिष्ठित जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के स्नातक होने के नाते वे प्रतिबद्धता, दक्षता और नैतिक सेवा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे उन्हें अपने पेशेवर जीवन में बनाए रखना होगा।भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का संदर्भ दिया, जो निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक और उपशामक स्वास्थ्य सेवाओं को समाहित करने वाले व्यापक दृष्टिकोण की परिकल्पना करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्नातक विद्यार्थी स्वास्थ्य सेवा वितरण के इन महत्वपूर्ण आयामों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आयुष्मान भारत के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में बोलते हुए उन्होंने इसके चार प्रमुख स्तंभों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के व्यापक नेटवर्क पर प्रकाश डाला, जिनकी संख्या अब 1.8 लाख से अधिक है। ये नेटवर्क अब केवल प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य तक सीमित न रहकर गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की जांच, शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन पर व्यापक ध्यान दे रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि इन केंद्रों का उद्देश्य अब कम से कम 12 व्यापक सेवा पैकेज प्रदान करना है, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, उपशामक देखभाल तथा मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी बिमारियों की जांच शामिल है।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) और राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों सहित 2 लाख से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में बुनियादी ढांचे और सेवाओं की कमियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि लगभग 64,000 सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को पहले ही एनक्यूएएस प्रमाणन प्राप्त हो चुका है तथा उन्होंने स्नातकों से उन संस्थानों में गुणवत्ता सुधार हेतु सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया, जहां वे कार्य करेंगे।
उन्होंने आयुष्मान भारत के अन्य स्तंभों का भी उल्लेख किया, जिनमें आयुष्मान भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) शामिल है, जो लाभार्थियों को वित्तीय सुरक्षा और स्वास्थ्य आश्वासन प्रदान करती है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के माध्यम से एबीएचए खाते बनाए जा रहे हैं, जिससे डिजिटल स्वास्थ्य अभिलेखों और डेटा-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम बनाया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एभिम) का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत गहन देखभाल ब्लॉकों की स्थापना और वायरल अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशालाओं (वीआरडीएल) के नेटवर्क के विस्तार जैसी पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ किया जा रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवर भारत की स्वास्थ्य प्रणाली का आधार हैं तथा वे सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैदानिक सेवओं दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने राष्ट्रीय नर्सिंग और दाई आयोग अधिनियम तथा संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम जैसे प्रमुख विधायी सुधारों का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य इन क्षेत्रों में शिक्षा, विनियमन और पेशेवर मानकों को सुदृढ़ बनाना है।
उन्होंने क्षमता-निर्माण से जुडी महत्वपूर्ण पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ स्थित 157 नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में 1 लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इटली, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस जैसे देशों के साथ साझेदारी कर रही है, जिससे भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर सेवाएं देने के अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने स्नातकों को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में “भारत के राजदूत” की संज्ञा दी।
अपने संबोधन के समापन में उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की ओर बढ रहा है, इसकी नींव ‘स्वस्थ भारत’ प्राप्त करने पर टिकी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक होने वाले ये विद्यार्थी इस विजन को साकार करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएंगे और देश को एक अधिक स्वस्थ तथा विकसित भविष्य की ओर अग्रसर करेंगे।यह दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि का प्रतीक रहा, जिसमें कुल 320 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें एम.एससी. (नर्सिंग), एम.एससी. (संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान), मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (एमपीएच), बी.एससी. नर्सिंग तथा बी.एससी. (संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान) शामिल थे। डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एम.एससी. (नर्सिंग) में 55, एम.एससी. (एएचएस) में 49, एमपीएच में 36, बी.एससी. नर्सिंग में 94 तथा बी.एससी. (एएचएस) में 86 शामिल थे।
शैक्षणिक उत्कृष्टता के सम्मानस्वरूप 24 विद्यार्थियों को उनके अपने-अपने पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए पदक और इनडाउमन्ट पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें एम.एससी. (नर्सिंग) के 2, एम.एससी. (एएचएस) के 8, एमपीएच के 2, बी.एससी. नर्सिंग का 1 तथा बी.एससी. (एएचएस) के 11 विद्यार्थी शामिल थे।
इस अवसर पर पुडुचेरी सरकार के मुख्य सचिव डॉ. शरत चौहान, जेआईपीएमईआर के निदेशक डॉ. वीर सिंह नेगी, संकाय सदस्य, विशिष्ट अतिथि और अभिभावक उपस्थित थे।यह दीक्षांत समारोह चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता के प्रति जेआईपीएमईआर की प्रतिबद्धता तथा देश में एक सुदृढ और सक्षम स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण में इसके निरंतर योगदान की पुन:पुष्टि करता है।
