जल सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा, टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर रहेगा जोर

चंडीगढ़(बलविंदर सिंह): हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश में “वाटर सिक्योर हरियाणा” कार्यक्रम को लागू किया जाएगा ताकि जल सुरक्षा को सुदृढ़ तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को और अधिक बढ़ावा दिया जा सके।

श्री राणा आज यहां अपने कार्यालय में कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक श्री राजनारायण कौशिक , अतिरिक्त निदेशक श्री रामप्रताप सिहाग एवं डॉ देवेंद्र सिहाग के अलावा अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम अथवा योजना का मुख्य उद्देश्य सब-सरफेस और वर्टिकल ड्रेनेज तकनीकों के माध्यम से सेम प्रभावित भूमि को उपजाऊ बनाना, जल-दक्ष फसलों और आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करना, जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाना तथा अधिक पानी की खपत वाली फसलों का क्षेत्रफल कम करके किसानों की आय में वृद्धि करना है।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को क्लस्टर-आधारित रणनीति के तहत लागू किया जाएगा। जलभराव और लवणता सुधार के लिए झज्जर और रोहतक सहित अन्य प्रभावित जिलों के क्लस्टर-13 में 2.0 लाख एकड़ भूमि को लक्षित किया गया है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से ड्रेनेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। फसल विविधीकरण और पानी की बचत के उद्देश्य से कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और करनाल के क्लस्टर-5 में 5.0 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई (DSR) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, वहीं क्लस्टर-13 में 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ के तहत वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त दोनों क्लस्टरों में मृदा परीक्षण के आधार पर जिप्सम और हरी खाद के उपयोग को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि इस कार्यक्रम को वर्ष 2026 से 2032 तक कुल छह वर्षों की अवधि में लागू करने का प्रस्ताव है, जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹5,714.80 करोड़ तय की गई है। इस परियोजना के लिए 70 प्रतिशत राशि यानी ₹4,000.36 करोड़ विश्व बैंक द्वारा वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान की जाएगी, जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि यानी ₹1,714.44 करोड़ हरियाणा सरकार अपने अंशदान के रूप में वहन करेगी।

यह वित्तपोषण विश्व बैंक की ‘प्रोग्राम-फॉर-रिजल्ट्स’ प्रणाली के अंतर्गत किया जाएगा, जिसमें धनराशि का वितरण पूर्व-निर्धारित सूचकांकों की उपलब्धि पर निर्भर रहेगा। नीति आयोग, केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय सहित विभिन्न केंद्रीय विभागों और राज्य मंत्रिमंडल से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से विश्व बैंक के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है, जिसकी अंतिम ऋण स्वीकृति अक्टूबर 2026 तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा इस परियोजना के कृषि घटक के लिए ₹886.00 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जो कुल परियोजना लागत का लगभग 16 प्रतिशत है। इसमें से ₹436.00 करोड़ का उपयोग जलभराव तथा लवणीय (सेम) भूमि के सुधार के लिए किया जाएगा, जबकि ₹450.00 करोड़ की राशि धान की सीधी बीजाई (DSR), ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के अंतर्गत फसल विविधीकरण, ढैंचा आधारित हरी खाद और जिप्सम के प्रयोग को बढ़ावा देने पर खर्च की जाएगी।

बैठक के अंत में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सभी क्लस्टरों में वर्षवार निर्धारित लक्ष्यों को पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करें ताकि किसानों को इस योजना का सीधा और त्वरित लाभ मिल सके।

By Balwinder Singh

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