नई दिल्ली(राजीव शर्मा): भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज पणजी में गोवा के 40वें राज्य स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया।
उपराष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गोवा को राज्य का दर्जा प्राप्त हुए चार दशक पूरे होने के इस महत्वपूर्ण अवसर पर गोवा के लोगों के साथ शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद यह गोवा की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।
30 मई 1987 के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए, जब गोवा भारत का 25वां राज्य बना, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर गोवा के लोगों की अनूठी पहचान, आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक भावना की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि गोवा विरासत और प्रगति, परंपरा और आधुनिकता, तथा स्थानीय गौरव और वैश्विक दृष्टिकोण का संगम है।
उपराष्ट्रपति ने शिक्षा, नागरिक चेतना और सामाजिक समावेशिता के प्रति गोवा के लोगों की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोगों की गर्मजोशी और आतिथ्य सत्कार गोवा को वास्तव में विशेष बनाते हैं और साक्षरता, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण जागरूकता और मानव विकास में राज्य की उपलब्धियां राष्ट्र के लिए उदाहरण है।
उपराष्ट्रपति ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया जिनकी सादगी, ईमानदारी और समर्पण ने गोवा की प्रगति पर एक अमिट छाप छोड़ी।
उपराष्ट्रपति ने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य को प्रगति और समृद्धि की ओर अग्रसर किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. सावंत के नेतृत्व में गोवा ने बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन और डिजिटल शासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है साथ ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पहचान को भी सुरक्षित रखा है।
उपराष्ट्रपति ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में, विशेषकर चुनावों के दौरान, मतभेद और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनावों के बाद, सभी वर्गों को राष्ट्र के विकास के लिए सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना से मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि गोवा का जीवंत लोकतंत्र और मजबूत सामुदायिक संस्थाएं एक ऐसे समाज को दर्शाती हैं जो सहभागिता, संवाद और गरिमा को महत्व देते हैं।
